विश्व
ट्रंप शी की व्हाइट हाउस में मुलाकात AI पर सहयोग बढ़ाने की हुई बात
Ratna Netam
25 Sept 2026 8:46 PM IST

x
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ व्हाइट हाउस में हुई बातचीत को अमेरिका और चीन दोनों के लिए “बहुत काम की” बैठक बताया। दोनों नेताओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद ट्रंप ने दावा किया कि शी उनके द्वारा AI के लिए इस्तेमाल किए जा रहे “Super Intelligence” नाम को पसंद करते हैं।शी जिनपिंग 24 सितंबर को व्हाइट हाउस पहुंचे थे, जहां ट्रंप ने उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय वार्ता की और बाद में राजकीय भोज में भी हिस्सा लिया। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तथा अत्याधुनिक तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा जारी है। दोनों देश AI के विकास में भी दुनिया की प्रमुख ताकतों में शामिल हैं।
शुक्रवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर बैठक के बारे में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे दोनों देशों के लिए बेहद सकारात्मक और उपयोगी बताया तथा कहा कि आगे महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में एक बार फिर AI के लिए “Super Intelligence” शब्द इस्तेमाल किया और दावा किया कि शी भी इस नाम को पसंद करते दिखाई दिए।हालांकि “Super Intelligence” पहले से तकनीकी चर्चाओं में एक अलग अवधारणा के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। आम तौर पर इसका अर्थ ऐसी काल्पनिक या भविष्य की बुद्धिमत्ता से लिया जाता है, जो कई क्षेत्रों में मानव क्षमताओं से आगे निकल जाए। ऐसे में ट्रंप की ओर से AI को व्यापक रूप से “Super Intelligence” कहने का प्रस्ताव उनकी अपनी शब्दावली है, न कि AI का नया आधिकारिक या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत नाम।
बैठक से पहले भी ट्रंप ने संकेत दिया था कि AI उनकी और शी की बातचीत का प्रमुख विषय होगा। व्हाइट हाउस में स्वागत के दौरान ट्रंप ने सुरक्षा, तकनीक और AI को महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल बताया था। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में कई बार AI के लिए “Super Intelligence” शब्द का इस्तेमाल किया है।चीन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में भी AI पर हुई बातचीत का उल्लेख किया गया। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार शी जिनपिंग ने कहा कि अमेरिका और चीन दोनों के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में मजबूत क्षमताएं हैं। दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा हो सकती है, लेकिन सहयोग की गुंजाइश उससे भी अधिक हो सकती है।
शी ने कहा कि दोनों देशों के लिए उचित तरीका एक-दूसरे की ताकत का फायदा उठाना है, न कि हर समय एक-दूसरे से बचाव करने की कोशिश करना। उन्होंने AI के फायदे और जोखिमों पर संवाद जारी रखने तथा इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत का समर्थन किया। चीनी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार शी ने इस बात पर भी जोर दिया कि AI को मानव नियंत्रण में रहना चाहिए और उसका विकास मानवता की प्रगति के लिए होना चाहिए।
चीन के आधिकारिक बयान में ट्रंप के हवाले से कहा गया कि अमेरिका और चीन को AI पर संवाद बनाए रखना और सहयोग मजबूत करना चाहिए। इस तरह दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं ने AI में प्रतिस्पर्धा के बावजूद संवाद के लिए जगह बनाए रखने का संकेत दिया।AI हाल के वर्षों में अमेरिका-चीन संबंधों का प्रमुख तकनीकी मुद्दा बन चुका है। अमेरिका ने अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर और AI चिप से संबंधित कुछ तकनीकों पर चीन के लिए निर्यात प्रतिबंध लगाए हैं। दूसरी ओर चीन अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर और AI क्षमता बढ़ाने में निवेश कर रहा है। दोनों देशों की कंपनियां बड़े AI मॉडल, डेटा सेंटर, चिप और दूसरी उन्नत तकनीकों के विकास में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
ट्रंप प्रशासन का जोर अमेरिका को AI में वैश्विक बढ़त दिलाने पर रहा है। ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी AI की दौड़ को महत्वपूर्ण बताया था। वहीं शी की सरकार AI के विकास के साथ इसके नियंत्रण, सुरक्षा और राष्ट्रीय तकनीकी क्षमता पर जोर देती रही है।हाल में अमेरिका और चीन के आर्थिक अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में भी AI सुरक्षा से संबंधित एक संभावित सूचना तंत्र का प्रस्ताव सामने आया था। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और चीनी उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग के बीच बातचीत के दौरान अमेरिका ने महत्वपूर्ण AI घटनाओं से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था पर विचार करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि उस समय किसी औपचारिक व्यवस्था की घोषणा नहीं हुई थी।
ट्रंप और शी की बैठक केवल AI तक सीमित नहीं रही। दोनों नेताओं ने व्यापार और वैश्विक राजनीतिक मुद्दों पर भी बातचीत की। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार मध्य पूर्व की स्थिति, यूक्रेन संकट और कोरियाई प्रायद्वीप से जुड़े विषय भी चर्चा में आए। इसके अलावा ताइवान को लेकर शी ने चीन की पुरानी स्थिति दोहराई।व्यापार के मोर्चे पर दोनों देशों ने फिलहाल तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश की है। Reuters के मुताबिक मौजूदा व्यापारिक व्यवस्था को दो महीने के लिए आगे बढ़ाया गया है, जबकि व्यापक समझौते के लिए बातचीत जारी है। इससे यह स्पष्ट है कि व्हाइट हाउस की उच्चस्तरीय बैठक के बावजूद अमेरिका-चीन के बीच कई बड़े आर्थिक मतभेद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
शी ने अमेरिका और चीन के संबंधों को ऐसी दिशा में ले जाने की बात कही जिसमें सहयोग प्रमुख हो, प्रतिस्पर्धा सीमाओं के भीतर रहे और मतभेदों को नियंत्रित किया जा सके। दूसरी ओर ट्रंप ने बैठक को सफल बताते हुए दोनों देशों के रिश्तों को लेकर सकारात्मक उम्मीद जताई।दोनों नेताओं की AI पर चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और चीन इस तकनीक के विकास में एक-दूसरे के प्रमुख प्रतिस्पर्धी हैं। AI चिप, कंप्यूटिंग क्षमता, बड़े भाषा मॉडल और तकनीकी मानकों को लेकर दोनों देशों की नीतियां आने वाले वर्षों में वैश्विक तकनीकी व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।
फिलहाल बैठक से AI सहयोग को लेकर किसी बड़े बाध्यकारी समझौते की घोषणा नहीं हुई है। इसके बावजूद दोनों नेताओं की ओर से संवाद जारी रखने और AI के जोखिमों तथा संभावनाओं पर चर्चा की बात करना महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। ट्रंप ने जहां बैठक के बाद “Super Intelligence” शब्द को प्रमुखता दी, वहीं शी ने प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग और AI को मानव नियंत्रण में रखने पर जोर दिया। इस तरह व्हाइट हाउस की बैठक में तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच अमेरिका और चीन ने AI पर बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कही।
Next Story





