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जिनेवा में बलूच कार्यकर्ताओं का प्रदर्शनतस्वीरों के जरिए मानवाधिकार संकट उठाया
Ratna Netam
25 Sept 2026 8:14 PM IST

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जिनेवा। बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के साथ संगठन ने एक फोटो प्रदर्शनी भी आयोजित की, जिसमें बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी, हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े मामलों को तस्वीरों के जरिए प्रस्तुत किया गया। BNM ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन आरोपों की जांच और बलूचिस्तान की स्थिति पर अधिक ध्यान देने की मांग की।संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का 63वां नियमित सत्र जिनेवा में 7 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। परिषद के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार इस दौरान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मानवाधिकार परिस्थितियों पर चर्चा हो रही है।
इसी सत्र के दौरान BNM ने जिनेवा में अपनी गतिविधियां आयोजित कीं। संगठन के समर्थकों ने प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगाए और बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने जबरन गुमशुदगी, कथित गैर-न्यायिक हत्याओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दे उठाए।BNM के चेयरमैन नसीम बलूच ने ANI से बातचीत में पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिनेवा यात्रा के दौरान फोटो प्रदर्शनी, विरोध प्रदर्शन और दूसरी गतिविधियों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बलूचिस्तान की परिस्थितियों से अवगत कराना है।
नसीम बलूच ने दावा किया कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान पर “जबरन कब्जा” कर रखा है। यह BNM की राजनीतिक स्थिति है; पाकिस्तान बलूचिस्तान को अपने संघीय ढांचे का संवैधानिक प्रांत मानता है और अलगाववादी संगठनों के इस दावे को स्वीकार नहीं करता।नसीम बलूच ने यह भी आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में पिछले कुछ वर्षों में मानवाधिकार उल्लंघन बढ़े हैं। उन्होंने कथित “किल एंड डंप” नीति का जिक्र करते हुए दावा किया कि लोगों को अगवा कर जबरन गायब किया जाता है और बाद में कुछ लोगों के शव बरामद होते हैं। इन विशिष्ट आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस प्रदर्शन से नहीं होती और पाकिस्तान सरकार ऐसे आरोपों तथा अलगाववादी समूहों के कई दावों का विरोध करती रही है।हालांकि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का मुद्दा लंबे समय से मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की चिंता का विषय रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पाकिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामलों को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि बलूच कार्यकर्ता तथा उनके परिवार इस समस्या से प्रभावित समूहों में शामिल रहे हैं।
BNM की ओर से आयोजित फोटो प्रदर्शनी का उद्देश्य भी इसी मुद्दे को दृश्य रूप में सामने रखना था। प्रदर्शनी में कथित पीड़ितों, लापता व्यक्तियों और मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े मामलों की तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। आयोजकों का कहना था कि तस्वीरों के जरिए वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और मानवाधिकार संगठनों का ध्यान उन घटनाओं की ओर खींचना चाहते हैं, जिन पर उनके मुताबिक पर्याप्त वैश्विक प्रतिक्रिया नहीं हुई है।BNM बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की वकालत करने वाला राजनीतिक संगठन है। इसलिए पाकिस्तान और बलूचिस्तान की संवैधानिक स्थिति को लेकर संगठन के वक्तव्य को उसके राजनीतिक दृष्टिकोण के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है। संगठन लंबे समय से यूरोप और अन्य देशों में प्रदर्शन, सम्मेलन और जागरूकता अभियान आयोजित करता रहा है।
जिनेवा में मौजूदा अभियान के दौरान BNM ने विरोध प्रदर्शन के अलावा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया है। जिनेवा प्रेस क्लब के कार्यक्रम विवरण के अनुसार 24 सितंबर को “Occupied Balochistan at the Crossroads: Human Rights, Justice and the Struggle for Freedom” शीर्षक से 12वां Balochistan International Conference आयोजित किया गया। सम्मेलन के शीर्षक में प्रयुक्त “Occupied Balochistan” BNM और आयोजकों की राजनीतिक शब्दावली है, न कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त आधिकारिक स्थिति।
सम्मेलन और प्रदर्शन के जरिए संगठन ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं तक अपना पक्ष पहुंचाने का प्रयास किया। BNM का कहना है कि बलूचिस्तान से संबंधित मानवाधिकार आरोपों पर स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़नी चाहिए।बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। इसके बावजूद प्रांत में दशकों से राजनीतिक असंतोष और सशस्त्र विद्रोह की समस्या रही है। कई बलूच राष्ट्रवादी समूह अधिक राजनीतिक अधिकार या स्वतंत्रता की मांग करते हैं, जबकि कुछ सशस्त्र संगठन पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों और नागरिकों पर हमलों में भी शामिल रहे हैं।
पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान में सुरक्षा अभियानों को आतंकवाद और अलगाववादी हिंसा से निपटने के लिए जरूरी बताती है। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना रहा है कि राज्य को नागरिकों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले करने वाले सशस्त्र समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। दूसरी ओर मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि आतंकवाद विरोधी या सुरक्षा अभियानों के दौरान भी मानवाधिकार कानूनों और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।यही वजह है कि बलूचिस्तान की स्थिति पर दो अलग-अलग पहलू सामने आते हैं। एक तरफ पाकिस्तान को सशस्त्र हमलों और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जबकि दूसरी तरफ जबरन गुमशुदगी और कथित गैर-न्यायिक कार्रवाई जैसे गंभीर मानवाधिकार आरोप लगातार उठते रहे हैं। इन मामलों में स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग मानवाधिकार संगठनों द्वारा समय-समय पर की जाती रही है।
जिनेवा में आयोजित प्रदर्शन के दौरान BNM ने इसी मानवाधिकार पहलू को प्रमुखता से सामने रखा। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी और अन्य उल्लंघनों पर ध्यान देने तथा स्वतंत्र जांच के लिए दबाव बनाने की अपील की।नसीम बलूच ने कहा कि फोटो प्रदर्शनी और विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य दुनिया के सामने उन लोगों की कहानियां रखना है, जिनके बारे में BNM का दावा है कि वे हिंसा या जबरन गुमशुदगी से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से बलूचिस्तान के मामलों की निगरानी बढ़ाने की मांग की।
UN मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान हुआ यह प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि जिनेवा में BNM द्वारा आयोजित अभियान का हिस्सा है। संगठन अब अपने प्रदर्शन, फोटो प्रदर्शनी और सम्मेलन के जरिए बलूचिस्तान के मानवाधिकार मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर लाने का प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान और BNM के बीच क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति को लेकर बुनियादी मतभेद बने हुए हैं, जबकि जबरन गुमशुदगी जैसे मानवाधिकार आरोप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता और जांच की मांग का विषय बने हुए हैं।
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