
x
हूतियों से क्यों परेशान है सऊदी अरब
सना: यमन के हूती विद्रोही कभी उत्तरी यमन के पहाड़ी इलाकों तक सीमित एक छोटा सशस्त्र आंदोलन थे, लेकिन पिछले करीब दो दशकों में उनकी सैन्य और राजनीतिक ताकत तेजी से बढ़ी है। आज उनके पास बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और समुद्री हमलों की क्षमता है। हाल के दिनों में लाल सागर तट पर हूतियों की बढ़त और सऊदी अरब के ठिकानों पर हमलों ने एक बार फिर रियाद की चिंता बढ़ा दी है।
हूती आंदोलन की जड़ें उत्तरी यमन के जैदी शिया समुदाय से जुड़ी हैं। 1990 के दशक के आखिर में धार्मिक और राजनीतिक आंदोलन के रूप में उभरे हूतियों ने बाद में यमन की सरकार के खिलाफ हथियार उठा लिए। 2011 के अरब स्प्रिंग के बाद यमन में पैदा हुई राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाकर उन्होंने अपना प्रभाव बढ़ाया और 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद यमन का संघर्ष गृहयुद्ध में बदल गया। हूतियों की बढ़ती ताकत को देखते हुए सऊदी अरब ने 2015 में अपने नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के साथ यमन में हस्तक्षेप किया। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार को दोबारा स्थापित करना और हूतियों को पीछे धकेलना था। वर्षों तक चले हवाई हमलों और सैन्य अभियान के बावजूद हूतियों को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका। 2022 के संघर्षविराम के बाद बड़े पैमाने पर लड़ाई कम हुई थी, लेकिन स्थायी राजनीतिक समाधान नहीं निकल पाया।
हूतियों की सैन्य क्षमता बढ़ने के पीछे ईरान की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ईरान पर हूतियों को हथियार, मिसाइल और ड्रोन तकनीक, प्रशिक्षण तथा दूसरी सैन्य सहायता उपलब्ध कराने के आरोप लगते रहे हैं। तेहरान हूतियों का प्रमुख बाहरी समर्थक है, हालांकि विशेषज्ञ इस रिश्ते को पूरी तरह प्रत्यक्ष नियंत्रण वाला संबंध मानने के बजाय कई बार रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखते हैं।
हाल के वर्षों में हूतियों ने लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल कर अपनी क्षमता दिखाई है। Reuters के मुताबिक उनके कुछ बैलिस्टिक हथियार 1,000 मील से ज्यादा दूरी तक हमला करने में सक्षम हैं। उन्होंने सऊदी अरब के शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है और लाल सागर में जहाजों पर भी हमले किए हैं। रियाद के लिए सबसे बड़ी चिंता यमन की भौगोलिक स्थिति है। दोनों देशों की लंबी सीमा है और यमन के पश्चिम में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य स्थित है, जो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा परिवहन का महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। हालिया हूती बढ़त ने इस क्षेत्र में सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को और गंभीर कर दिया है।
सितंबर 2026 में हूती बलों ने लाल सागर तट पर महत्वपूर्ण इलाकों पर तेजी से बढ़त बनाई। Reuters के मुताबिक उनके हालिया अभियान ने सऊदी समर्थित यमनी बलों को पीछे धकेला और हूतियों को बाब अल-मंदेब के आसपास ज्यादा रणनीतिक प्रभाव दिया है। सऊदी अरब की चिंता केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। तेल प्रतिष्ठान, बंदरगाह और निर्यात मार्ग भी हूती हमलों की जद में आ सकते हैं। यही कारण है कि एक समय स्थानीय विद्रोही आंदोलन माने जाने वाले हूती अब रियाद के लिए सैन्य, आर्थिक और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी बड़ी रणनीतिक चुनौती बन चुके हैं।
Next Story





