चीनी पत्रकार के प्रत्यर्पण पर Thailand को चेतावनी, मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

Bangkok , बैंकॉक : एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत 59 संगठनों के एक समूह ने थाई सरकार से हिरासत में लिए गए चीनी खोजी पत्रकार बाई झाओडोंग को वापस भेजने (निर्वासन) की योजना को तुरंत रोकने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि उन्हें चीन वापस भेजने से उन्हें मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का सामना करना पड़ सकता है। प्रेस की आज़ादी, मानवाधिकार और पत्रकारों के हक में काम करने वाले संगठनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि बाई को जबरन चीन वापस भेजे जाने का खतरा है। बाई अभी बैंकॉक के सुआन फ्लू इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर में हैं; वे जनवरी 2026 से इमिग्रेशन हिरासत में हैं। बयान के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने सितंबर 2024 में "जबरन वसूली" के आरोप में बाई के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। संगठनों का कहना है कि यह आरोप राजनीतिक कारणों से और मनगढ़ंत है। उनका यह भी आरोप है कि थाई अधिकारियों ने बाई को किसी सुरक्षित तीसरे देश जाने से रोका है, जिससे उनके निर्वासन का खतरा बढ़ गया है।इन समूहों ने चेतावनी दी है कि अगर बाई को चीन वापस भेजा जाता है, तो उन्हें राजनीतिक उत्पीड़न, मनमानी हिरासत, जबरन गायब किए जाने, यातना और उनके मौलिक अधिकारों के अन्य गंभीर उल्लंघनों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने जोर दिया कि जबरन वापसी 'नॉन-रिफ्यूलमेंट' (non-refoulement) के अंतरराष्ट्रीय सिद्धांत के तहत थाईलैंड की जिम्मेदारियों का उल्लंघन होगा। यह सिद्धांत लोगों को ऐसे देशों में वापस भेजने पर रोक लगाता है जहां उन्हें यातना या उत्पीड़न का वास्तविक खतरा हो।
यह अपील मानवाधिकार रक्षकों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिवेदक एंड्रिया बोलानोस वर्गास द्वारा जताई गई चिंताओं के अनुरूप है। उन्होंने थाईलैंड से निर्वासन की प्रक्रिया को तुरंत रोकने, बाई को किसी सुरक्षित देश भेजने में मदद करने और उनकी सुरक्षा व उचित स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच सुनिश्चित करने का आग्रह किया था।बयान के अनुसार, बाई झाओडोंग ने चीन में 25 से अधिक वर्षों तक खोजी पत्रकार के रूप में काम किया है और हाल ही में बीजिंग स्थित प्रकाशन 'काइजिंग' (Caijing) पत्रिका के लिए रिपोर्टिंग की थी।
उनकी जांच में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और वित्तीय धोखाधड़ी के नेटवर्क का खुलासा हुआ था, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध गतिविधियां शामिल थीं। जांच के नतीजों में कथित तौर पर स्थानीय सरकारी अधिकारियों और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों की संलिप्तता सामने आई थी।
अपनी जांच के प्रकाशन के बाद, बाई को स्थानीय और केंद्रीय चीनी अधिकारियों की ओर से कड़ी निगरानी, डराने-धमकाने और लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इससे यह आशंका पैदा हो गई कि चीन वापस भेजे जाने पर उन्हें गंभीर प्रतिशोध का सामना करना पड़ सकता है।





