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ISI के साए में खत्म हो रहे आतंकी, किसका खेल?

Uma Verma
18 March 2025 8:53 AM IST
ISI के साए में खत्म हो रहे आतंकी, किसका खेल?
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इस्लामाबाद: पाकिस्तान में भारत विरोधी आतंकी संगठनों के शीर्ष कमांडरों की रहस्यमयी मौतों का सिलसिला जारी है। हाल ही में कई खूंखार आतंकियों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान में कोई आतंकी सफाई अभियान चल रहा है? या फिर ISI अपने ही मोहरों को खत्म कर रही है?

कैसे हो रही आतंकियों की मौत?

  • बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब में बीते कुछ महीनों में कई वांछित आतंकियों की रहस्यमयी हत्याएं हुई हैं।
  • इनमें से कुछ ड्रोन हमलों में मारे गए, तो कुछ को करीबी सहयोगियों ने ही निशाना बना दिया
  • ISI के इशारे पर या अंदरूनी गुटबाजी में हो रहे ये हमले, यह सवाल अब चर्चा में है।

ISI का खेल या गुप्त ऑपरेशन?

  • पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI अक्सर आतंकियों को पनाह देती रही है, लेकिन अब अपने ही बनाए संगठनों के बड़े नाम निशाने पर आ रहे हैं
  • टीटीपी, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के कई कमांडरों का सफाया हो चुका है।
  • क्या यह पाकिस्तान के भीतर कोई आंतरिक सत्ता संघर्ष है, या फिर ISI ही अपने 'पुराने मोहरों' से पीछा छुड़ा रही है?

बलूचिस्तान से पंजाब तक कौन दे रहा इन हमलों को अंजाम?

  • बलूचिस्तान में विद्रोही गुटों पर हमलों की संख्या बढ़ी है, जिससे यह आशंका बढ़ी कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आतंकियों के खिलाफ खुद ही कार्रवाई कर रही है
  • पंजाब और सिंध में गैंगस्टरों और आतंकियों की रहस्यमयी मौतों ने और भी सवाल खड़े कर दिए हैं
  • कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां भी इन घटनाओं के पीछे हो सकती हैं

क्या ISI अपनी नीति बदल रही है?

  • पाकिस्तानी सेना और ISI पर पश्चिमी देशों और FATF का दबाव बढ़ रहा है, जिससे वे आतंकवाद को लेकर नई रणनीति पर काम कर सकते हैं
  • भारत के खिलाफ इस्तेमाल किए गए कई आतंकी अब ISI के लिए बोझ बन चुके हैं, इसलिए उन्हें खत्म किया जा रहा है
  • लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह सिर्फ आतंकी संगठनों के अंदर की गुटबाजी का नतीजा है या पाकिस्तान की नीति में बड़ा बदलाव?

आगे क्या?

अगर पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के सफाए की यह लहर जारी रहती है, तो इससे भारत को फायदा हो सकता है। लेकिन क्या ISI आतंकियों के खिलाफ पूरी तरह मोर्चा खोलेगी या सिर्फ पुराने नामों से पीछा छुड़ाएगी? यह देखना दिलचस्प होगा।


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