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बीजिंग/नई दिल्ली: चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत और चीन ने एक-दूसरे से सीखा है और उनके संबंधों में संवाद अहम है। बीजिंग का मानना है कि यह टिप्पणी सकारात्मक संबंधों को बढ़ावा देने वाली है और इससे आर्थिक एवं कूटनीतिक सहयोग को नया आयाम मिल सकता है।
चीन की प्रतिक्रिया
- चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि "भारत और चीन दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं हैं और उनका सहयोग वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी है।"
- चीन ने इस बयान को रचनात्मक और संबंधों में सुधार की दिशा में एक अच्छा संकेत बताया।
- बीजिंग ने कहा कि सीमा विवाद के बावजूद वार्ता और सहयोग जारी रहना चाहिए।
क्या बदलेगा भारत-चीन संबंधों में?
- व्यापार और निवेश को लेकर दोनों देशों के बीच नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
- कूटनीतिक वार्ता को मजबूत करने के लिए नए प्रस्तावों पर चर्चा संभव है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा विवाद और व्यापारिक मतभेदों के बावजूद रिश्तों में स्थिरता लाने की कोशिश हो रही है।
भविष्य की संभावनाएं
- गलवान विवाद के बाद संबंधों में तनाव रहा है, लेकिन इस बयान से वार्ता का रास्ता खुल सकता है।
- यदि दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर नए समझौतों की ओर बढ़ते हैं, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए फायदेमंद होगा।
- अब देखना होगा कि क्या यह बयान सिर्फ कूटनीतिक शिष्टाचार है या इसके पीछे ठोस रणनीति भी है।
भारत और चीन के बीच नए समीकरण बन सकते हैं, लेकिन यह भविष्य ही बताएगा कि यह संबंधों में सुधार की ओर बढ़ता कदम है या सिर्फ एक औपचारिक प्रतिक्रिया।
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