
वाशिंगटन। दक्षिण चीन सागर में चीन की ओर से किए गए हालिया बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च को लेकर ताइवान की निगरानी क्षमता चर्चा में आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान के लॉन्ग-रेंज अर्ली-वार्निंग रडार सिस्टम ने चीनी मिसाइल लॉन्च को सफलतापूर्वक ट्रैक किया और इस दौरान अमेरिका के साथ रीयल-टाइम खुफिया जानकारी साझा की गई।
यह घटनाक्रम चीन, ताइवान और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों के बीच सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिसाइल गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता किसी भी देश के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होती है, खासकर ऐसे क्षेत्र में जहां सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
दक्षिण चीन सागर में चीन की सैन्य गतिविधियों पर कई देशों की नजर रहती है। ताइवान के पास मौजूद लॉन्ग-रेंज अर्ली-वार्निंग रडार सिस्टम लंबी दूरी तक होने वाली मिसाइल और हवाई गतिविधियों का पता लगाने में सक्षम है। इसी प्रणाली के जरिए चीनी मिसाइल लॉन्च की निगरानी की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान ने इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिका के साथ तत्काल जानकारी साझा की। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा और खुफिया सहयोग की गहराई का संकेत मिलता है। हालांकि, इस मामले में अमेरिका या चीन की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
चीन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसने किस प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था। लेकिन ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव जोसेफ वू ने संभावना जताई है कि यह मिसाइल चीन की जेएल-2 सबमरीन-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) हो सकती है।
जेएल-2 मिसाइल चीन की परमाणु क्षमता से जुड़ी रणनीतिक हथियार प्रणाली का हिस्सा मानी जाती है। इसे चीन की नौसेना की पनडुब्बियों से लॉन्च किया जा सकता है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो यह चीन की समुद्री परमाणु क्षमता और सैन्य तैयारियों से जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा।
ताइवान लंबे समय से चीन की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखता आया है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य तनाव के चलते ताइवान अपनी निगरानी और रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। अमेरिका भी ताइवान के साथ सुरक्षा सहयोग बनाए हुए है, जिसे चीन लगातार विरोध करता रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिसाइल परीक्षणों को ट्रैक करना केवल निगरानी का विषय नहीं होता, बल्कि इससे मिसाइल की क्षमता, दिशा, गति और संभावित रणनीतिक उद्देश्य को समझने में मदद मिलती है। ऐसे डेटा से देशों को अपनी सुरक्षा रणनीति तैयार करने में सहायता मिलती है।
दक्षिण चीन सागर पहले से ही क्षेत्रीय तनाव का केंद्र रहा है। चीन, ताइवान और अमेरिका के बीच सैन्य गतिविधियों को लेकर समय-समय पर बयानबाजी होती रही है। ऐसे में किसी भी मिसाइल परीक्षण और उसकी निगरानी की घटना को क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जाता है।
फिलहाल चीन की ओर से मिसाइल परीक्षण से जुड़ी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन ताइवान के रडार द्वारा इसे ट्रैक किए जाने और अमेरिका के साथ जानकारी साझा किए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है।





