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शुभेंदु अधिकारी की चेतावनी से विवाद नेपाल बाढ़ में शवों की पहचान बनी चुनौती
Ratna Netam
29 Aug 2026 7:12 PM IST

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जाधवपुर यूनिवर्सिटी (JU) को लेकर विवाद तेज हो गया है। भाजपा नेता **शुभेंदु अधिकारी** ने यूनिवर्सिटी परिसर में कथित तौर पर लगाए जा रहे कुछ नारों को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि जिस तरह जेएनयू और उस्मानिया यूनिवर्सिटी में संगठन ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, उसी तरह अब जाधवपुर यूनिवर्सिटी में भी बदलाव की जरूरत है।
शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग विश्वविद्यालयों को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में विचार रखने की आजादी होनी चाहिए, लेकिन देश की एकता और अखंडता के खिलाफ किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। भाजपा जहां इसे राष्ट्रहित से जुड़ा मुद्दा बता रही है, वहीं विपक्ष इसे विश्वविद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है।
नेपाल में बाढ़ की तबाही मुर्दाघर शवों से भरे
काठमांडू। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और कई लोग अब भी लापता हैं। हालात इतने भयावह हो गए हैं कि कई इलाकों के मुर्दाघरों में शवों को रखने की जगह तक कम पड़ने लगी है। मृतकों की पहचान करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ([Live Hindustan][1])
बाढ़ के तेज बहाव ने कई गांवों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचाया है। कई परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में भटक रहे हैं। राहत और बचाव टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
नेपाल में आई इस त्रासदी का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ा है। कई भारतीय नागरिकों के फंसे होने और लापता होने की खबरें सामने आई हैं। भारत ने राहत और बचाव के लिए सहायता भेजी है।
सिलक्यारा रेस्क्यू के हीरो नेपाल में बचाव अभियान में जुटे
नेपाल की बाढ़ के बीच भारत ने विशेषज्ञ बचाव दल भेजे हैं। इस टीम में वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग हादसे में 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी।
सुरंग बचाव, मलबा हटाने और कठिन परिस्थितियों में काम करने का अनुभव रखने वाली यह टीम नेपाल में फंसे लोगों की मदद के लिए पहुंची है।
कठिन पहाड़ी इलाकों, खराब मौसम और लगातार बदलते हालात के बीच बचाव अभियान चलाना बड़ी चुनौती है। लेकिन भारतीय टीम अपने अनुभव और तकनीकी क्षमता के साथ राहत कार्यों में सहयोग कर रही है।
नेपाल बाढ़ में बढ़ता जा रहा संकट
नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। कई इलाकों में घर बह गए हैं और बड़ी संख्या में लोग बेघर हो चुके हैं।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाना और लापता लोगों की तलाश करना है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क टूटने के कारण राहत टीमों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत समेत कई देशों ने नेपाल के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है। राहत सामग्री, मेडिकल सहायता और विशेषज्ञ टीमों के जरिए प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
आपदा के बीच इंसानियत की मिसाल
नेपाल की त्रासदी ने जहां भारी नुकसान पहुंचाया है, वहीं इस मुश्किल समय में कई मानवीय प्रयास भी सामने आए हैं। स्थानीय लोग, सुरक्षा बल और राहत कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने में जुटे हैं।
भारत और नेपाल के बीच आपसी सहयोग भी इस आपदा के दौरान देखने को मिल रहा है। दोनों देशों की एजेंसियां प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
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