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रूस यूक्रेन युद्ध पर भारत की कूटनीति को समर्थन, लिथुआनिया की राजदूत ने की सराहना
Ratna Netam
3 Nov 2026 3:01 PM IST

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नई दिल्ली : 3 नवंबर 2026। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए भारत की कूटनीतिक भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिल रहा है। यूरोपीय देश लिथुआनिया ने यूक्रेन में शांति स्थापित करने के लिए भारत के प्रयासों का स्वागत किया है। लिथुआनिया की भारत में राजदूत डायना मिकेविचिएने ने भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्ष समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। लिथुआनिया के विदेश मंत्रालय ने भी भारत की शांति प्रयासों में योगदान देने की इच्छा का स्वागत किया है।लिथुआनिया का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। भारत लगातार दोनों देशों के बीच बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है। नई दिल्ली का मानना है कि युद्ध का स्थायी समाधान केवल सैन्य कार्रवाई से संभव नहीं है और इसके लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच सार्थक बातचीत आवश्यक है।
भारत की शांति पहल का लिथुआनिया ने किया स्वागत
लिथुआनिया के विदेश मंत्रालय के अनुसार, सितंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय वार्ता के दौरान लिथुआनिया के उप विदेश मंत्री जूलियस प्रानेविचियस ने यूक्रेन में शांति स्थापित करने के लिए भारत के योगदान की इच्छा का स्वागत किया था।इस बैठक में लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने और भारतीय विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। दोनों पक्षों ने रूस-यूक्रेन युद्ध, यूरोप की सुरक्षा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।लिथुआनिया ने भारत को यूक्रेन से जुड़ी मानवीय सहायता पहलों में भागीदारी बढ़ाने के लिए भी आमंत्रित किया था। इससे स्पष्ट होता है कि लिथुआनिया भारत को केवल एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार ही नहीं, बल्कि वैश्विक शांति प्रयासों में संभावित सहयोगी के रूप में भी देखता है।
प्रधानमंत्री मोदी लगातार कर रहे शांति की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं।अगस्त 2026 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि मानवीय दृष्टिकोण से युद्ध समाप्त होना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत संघर्ष रोकने के सभी शांति प्रयासों का समर्थन करता है और भविष्य में भी सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार रहेगा।भारत का रुख लगातार यही रहा है कि युद्ध से उत्पन्न समस्याओं का समाधान संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण तरीकों से निकाला जाना चाहिए।नई दिल्ली ने रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अपने राजनयिक संपर्क बनाए रखे हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की संभावित भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यूक्रेन की संप्रभुता पर लिथुआनिया का स्पष्ट रुख
लिथुआनिया ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का लगातार समर्थन किया है।लिथुआनिया सरकार का कहना है कि किसी भी स्थायी शांति समझौते में यूक्रेन की स्वतंत्रता और उसके नागरिकों के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।लिथुआनिया के विदेश मंत्री केस्तुतिस बुद्रिस ने जून 2026 में यूक्रेन के समर्थन को दोहराते हुए कहा था कि उनका देश यूक्रेन की स्वतंत्रता,संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जारी रखेगा।लिथुआनिया का मानना है कि शांति व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे भविष्य में संघर्ष दोबारा शुरू होने का खतरा कम हो और यूरोपीय सुरक्षा मजबूत बने।
भारत और यूरोप के बीच बढ़ सकता है कूटनीतिक सहयोग
यूक्रेन युद्ध के समाधान में भारत की भूमिका को लेकर यूरोपीय देशों की दिलचस्पी बढ़ना भारत-यूरोप संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।भारत और लिथुआनिया के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।दोनों देशों के बीच उच्च तकनीक, विशेष रूप से लेजर प्रौद्योगिकी और जीवन विज्ञान के क्षेत्रों में संभावनाओं पर भी चर्चा हुई है।मार्च 2026 में लिथुआनिया और भारत के बीच राजनीतिक परामर्श के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने तथा वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।लिथुआनिया ने भारत के साथ यूरोपीय संघ की साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया है।
युद्ध के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय बातचीत तेज
रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए विभिन्न देशों की ओर से कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच 10 और 11 नवंबर को अबू धाबी में बातचीत प्रस्तावित है।इन वार्ताओं में युद्ध समाप्त करने, तनाव कम करने, युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था और मानवीय सहायता जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।इसके अतिरिक्त यूरोपीय देशों के साथ यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बातचीत की तैयारियां चल रही हैं।हालांकि, रूस और यूक्रेन के बीच क्षेत्रीय नियंत्रण तथा सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर गंभीर मतभेद अब भी बने हुए हैं। ऐसे में किसी स्थायी शांति समझौते तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
युद्ध का असर केवल यूरोप तक सीमित नहीं
रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में शुरू हुए व्यापक युद्ध का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ा है।इस संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाई है।युद्ध के कारण बड़ी संख्या में नागरिकों को विस्थापन और मानवीय संकट का सामना करना पड़ा है।भारत जैसे विकासशील देशों के लिए भी वैश्विक स्थिरता महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव घरेलू अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।इसी वजह से भारत लंबे समय से युद्धविराम और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
क्या भारत निभा सकता है मध्यस्थ की भूमिका?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के अनुसार, रूस और यूक्रेन दोनों के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखना भारत की महत्वपूर्ण विशेषता है।भारत की रूस के साथ पुरानी रणनीतिक साझेदारी है, जबकि यूक्रेन के साथ भी राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय संबंध कायम हैं।ऐसे में भारत दोनों पक्षों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने में सहयोग दे सकता है।हालांकि, भारत की ओर से किसी औपचारिक मध्यस्थता प्रक्रिया का नेतृत्व करने की घोषणा नहीं की गई है। उसकी भूमिका फिलहाल शांति प्रयासों के समर्थन और संबंधित देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने पर केंद्रित है।लिथुआनिया की ओर से भारत के योगदान का स्वागत किया जाना इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है।आने वाले दिनों में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं और भारत की कूटनीतिक गतिविधियों पर विशेष नजर रहेगी। यदि संबंधित पक्ष बातचीत के माध्यम से मतभेद कम करने में सफल होते हैं, तो यह यूरोप के साथ-साथ वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
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