त्रिपुरा
BSF जवानों पर हमले से हड़कंप, SP ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
Ratna Netam
3 Nov 2026 2:40 PM IST

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अगरतला। त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। बॉक्सनगर के अशाबारी इलाके में हुई हिंसक घटना के सिलसिले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हमले में बीएसएफ के सहायक कमांडेंट सहित कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। सिपाहीजला जिले के पुलिस अधीक्षक बिजोय देबबर्मा ने कहा है कि घटना में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अन्य संदिग्धों की पहचान करने और घटना की पूरी परिस्थितियों का पता लगाने में जुटी हुई है।जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार, 2 नवंबर 2026 को अशाबारी इलाके में हुई। बीएसएफ की 49वीं बटालियन के जवान सीमा क्षेत्र में अपनी ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान कथित तस्करी गतिविधियों को लेकर एक स्थानीय व्यक्ति के साथ उनका विवाद हो गया। विवाद बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर एकत्र हो गए। कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।पुलिस के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने बॉक्सनगर-रहीमपुर सड़क को अवरुद्ध कर दिया। इसी दौरान भीड़ के कुछ सदस्यों ने बीएसएफ के अधिकारियों और जवानों पर हमला कर दिया। घटना में सहायक कमांडेंट रोहित कुमार और उनके साथ मौजूद सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। हमलावरों ने बीएसएफ के एक वाहन में भी तोड़फोड़ की।
तस्करी के संदेह से शुरू हुआ था विवाद
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बीएसएफ को अशाबारी सीमा क्षेत्र में संदिग्ध तस्करी गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके बाद जवानों ने संबंधित इलाके में कार्रवाई की।बताया जा रहा है कि एक स्थानीय व्यक्ति को तस्करी के संदेह में रोके जाने के बाद विवाद शुरू हुआ। स्थानीय लोगों की ओर से उस व्यक्ति के साथ मारपीट का आरोप लगाया गया। हालांकि, विवाद की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई और किस पक्ष की क्या भूमिका रही, इसकी जांच की जा रही है।घटना के बाद कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध जताते हुए सड़क पर प्रदर्शन किया। इसी दौरान भीड़ का एक हिस्सा हिंसक हो गया और बीएसएफ जवानों पर हमला कर दिया।
लाठी-डंडों से हमले का आरोप
बीएसएफ से जुड़े अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, हमले के दौरान कुछ लोगों के पास लाठी, बांस के डंडे और धारदार हथियार थे।आरोप है कि भीड़ ने सुरक्षाकर्मियों को घेरकर उनके साथ मारपीट की। इस दौरान एक जवान का सरकारी हथियार भी कथित तौर पर छीन लिया गया था, जिसे बाद में बरामद कर लिया गया।हमले में घायल सुरक्षाकर्मियों को बचाने के लिए आसपास के क्षेत्र से बीएसएफ के अतिरिक्त जवान मौके पर पहुंचे। इसके बाद घायलों को सुरक्षित निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।विभिन्न रिपोर्टों में तीन जवानों के घायल होने और सहायक कमांडेंट सहित चार सुरक्षाकर्मियों पर हमला होने का उल्लेख किया गया है।
पुलिस ने चलाया विशेष अभियान
घटना की जानकारी मिलने के बाद त्रिपुरा पुलिस ने आरोपियों की तलाश में अभियान शुरू किया। विशालगढ़ और कलमचौड़ा थाना क्षेत्रों की पुलिस टीमों ने विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।पुलिस ने हमले में कथित तौर पर शामिल आठ लोगों को हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है।बीएसएफ की शिकायत के आधार पर कलमचौड़ा थाने में मामला दर्ज किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में हत्या के प्रयास, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा पहुंचाने और हथियार छीनने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।हालांकि, पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपियों की वास्तविक भूमिका तथा दोष तय होगा।
SP बिजोय देबबर्मा ने दिया कार्रवाई का भरोसा
सिपाहीजला जिले के पुलिस अधीक्षक बिजोय देबबर्मा ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि सुरक्षाकर्मियों पर हमले में शामिल सभी लोगों की पहचान की जाएगी।उन्होंने भरोसा दिलाया कि घटना में शामिल व्यक्तियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई होगी।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।कुछ रिपोर्टों में प्राथमिकी में 18 आरोपियों के नाम दर्ज होने की जानकारी दी गई है, जबकि अन्य में 19 व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज होने का उल्लेख है। इस संख्या को लेकर आधिकारिक स्तर पर स्पष्टता आवश्यक है।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने जताई नाराजगी
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने बीएसएफ जवानों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है।मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सुरक्षाकर्मियों पर हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का भरोसा दिया।उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा के लिए काम करते हैं। ऐसे में उनके कर्तव्यों में बाधा डालना या उन पर हमला करना गंभीर मामला है।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा बनी चुनौती
त्रिपुरा की लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगती है। सीमा से जुड़े कुछ इलाकों में तस्करी और अवैध गतिविधियों को रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।बीएसएफ के जवान सीमा पर निगरानी रखने के साथ संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए नियमित अभियान चलाते हैं।सीमा क्षेत्रों में कई गांव अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक स्थित हैं। ऐसे में स्थानीय नागरिकों और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर संवाद बनाए रखना भी जरूरी माना जाता है।अशाबारी की घटना ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा अभियानों के दौरान कानून-व्यवस्था और जवानों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को सामने ला दिया है।
घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
इस हमले के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय की आवश्यकता पर चर्चा तेज हो गई है।पुलिस और बीएसएफ के सामने अब घटना की निष्पक्ष जांच करने, सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की चुनौती हैअधिकारियों का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से संबंधित जानकारी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान घटना से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।
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