
वर्ल्ड | दक्षिण कोरिया में राजनीतिक उथल-पुथल जारी है। प्रधानमंत्री हान डक-सू के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया महाभियोग प्रस्ताव संसद में खारिज कर दिया गया, जिससे हान को राहत मिली है। हालांकि, देश में बढ़ती अस्थिरता और राजनीतिक संकट को देखते हुए सरकार ने कार्यवाहक राष्ट्रपति की नियुक्ति कर दी है। इस बीच, राष्ट्रपति यून सुक-येओल की मुश्किलें कम होने की बजाय और बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि उनकी नीतियों को लेकर जनता और विपक्ष की नाराजगी बनी हुई है।
महाभियोग प्रस्ताव और उसकी पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री हान डक-सू के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव मुख्य रूप से विपक्षी दलों द्वारा लाया गया था। उन पर प्रशासनिक विफलता, नीतिगत निर्णयों में लापरवाही और भ्रष्टाचार से निपटने में ढिलाई बरतने जैसे आरोप लगाए गए थे। विपक्षी दलों का आरोप था कि हान की नीतियां देश की अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक स्थिरता को नुकसान पहुंचा रही हैं।
हालांकि, संसद में जब इस प्रस्ताव पर मतदान हुआ तो यह आवश्यक बहुमत हासिल करने में विफल रहा। इससे साफ हो गया कि हान को अभी सरकार में समर्थन हासिल है। महाभियोग प्रस्ताव के खारिज होने से उनके पद पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता अभी भी खत्म नहीं हुई है।
कार्यवाहक राष्ट्रपति की नियुक्ति
महाभियोग के खारिज होने के बावजूद, सरकार ने कार्यवाहक राष्ट्रपति की नियुक्ति का फैसला किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि विपक्ष और सत्ताधारी दलों के बीच लगातार टकराव बना हुआ है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। कार्यवाहक राष्ट्रपति की नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि सरकार भी मौजूदा संकट को हल्के में नहीं ले रही है और स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्रपति येओल के लिए बढ़ती चुनौतियां
प्रधानमंत्री हान को मिली राहत के बावजूद, राष्ट्रपति यून सुक-येओल के लिए हालात आसान नहीं हुए हैं। उनकी नीतियों को लेकर विपक्ष ही नहीं, बल्कि जनता में भी असंतोष बढ़ रहा है। देश में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है, बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी हो रही है, और सामाजिक असमानता के मुद्दे भी चर्चा में हैं।
इसके अलावा, विदेश नीति को लेकर भी येओल की सरकार को आलोचना झेलनी पड़ रही है। उत्तर कोरिया के साथ संबंधों में बढ़ता तनाव, चीन और अमेरिका के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती और जापान के साथ कूटनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव ने उनकी स्थिति और कमजोर कर दी है।
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण कोरिया में यह राजनीतिक अस्थिरता फिलहाल जारी रहेगी। प्रधानमंत्री हान के खिलाफ महाभियोग भले ही खारिज हो गया हो, लेकिन विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह सरकार को घेरने के लिए अन्य विकल्पों पर विचार करेगा। आने वाले दिनों में विपक्ष राष्ट्रपति येओल पर और दबाव डाल सकता है, जिससे कोरियाई राजनीति में और उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।





