
वर्ल्ड | दक्षिण कोरिया के गंगवोन और ग्योंगसांग प्रांतों में भयंकर जंगल की आग ने तबाही मचा दी है। आग की चपेट में आकर अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से अधिक इमारतें जलकर राख हो गई हैं। प्रशासन ने हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए आपातकालीन अभियान शुरू किया है।
तेज़ हवाओं से बेकाबू हुई आग
इस भीषण आग की शुरुआत गंगवोन प्रांत के पहाड़ी इलाकों से हुई, लेकिन तेज़ हवाओं के कारण यह तेजी से आसपास के रिहायशी इलाकों में फैल गई। आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की 100 से अधिक टीमें और 50 से अधिक हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं, लेकिन हवा की रफ्तार के चलते इसे नियंत्रित करना मुश्किल साबित हो रहा है।
26 की मौत, कई घायल
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग झुलस गए हैं। कई लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। स्थानीय अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है।
300 से ज्यादा इमारतें राख
आग ने 300 से अधिक घरों, दुकानों और अन्य इमारतों को पूरी तरह खाक कर दिया है। हजारों लोग बेघर हो गए हैं और सरकार ने उनके लिए अस्थायी राहत शिविरों की व्यवस्था की है। प्रभावित इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति भी ठप हो गई है।
राष्ट्रपति का आदेश, सेना भी तैनात
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक-योल ने हालात को देखते हुए आपातकालीन बैठक बुलाई और सेना को राहत कार्यों में शामिल होने का आदेश दिया। सेना के जवान प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।
आग लगने का कारण?
हालांकि आग लगने की सही वजह का पता नहीं चल सका है, लेकिन शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार सूखे मौसम और तेज़ हवाएं आग के फैलने की मुख्य वजह मानी जा रही हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि किसी लापरवाही या बिजली के शॉर्ट सर्किट से यह आग भड़की हो सकती है।
आगे क्या?
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दमकल और बचाव दल आग पर काबू पाने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं।
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प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
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सरकार ने प्रभावित लोगों को मुआवजा और पुनर्वास सहायता देने की घोषणा की है।
निष्कर्ष
दक्षिण कोरिया में यह जंगल की आग हाल के वर्षों में सबसे विनाशकारी बताई जा रही है। प्रशासन युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन तेज़ हवाएं इसे और विकराल बना रही हैं। आने वाले दिनों में स्थिति कैसी रहती है, यह इस पर निर्भर करेगा कि मौसम साथ देता है या नहीं।





