
वर्ल्ड | अमेरिका में टिकटॉक को बैन करने या जबरन बेचने की बहस के बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नया दांव चला है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर चीन टिकटॉक की बिक्री को आसान बनाने में मदद करता है, तो वह चीनी सामानों पर लगाए गए टैरिफ में कुछ रियायत देने को तैयार हैं। इस बयान ने अमेरिका और चीन के बीच पहले से जारी व्यापारिक तनाव को एक नए मोड़ पर ला दिया है।
टिकटॉक को लेकर बढ़ती सख्ती
अमेरिका में टिकटॉक को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन और सांसदों का मानना है कि इस ऐप के जरिए चीन अमेरिकी नागरिकों का डेटा चुरा सकता है। इसे लेकर जो बाइडेन प्रशासन ने टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस को अमेरिका में अपनी हिस्सेदारी बेचने का अल्टीमेटम दिया है।
हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस ने एक विधेयक पेश किया है, जिसके तहत टिकटॉक को या तो अमेरिका में अपनी संपत्ति बेचनी होगी या फिर इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। ट्रंप भी अपने कार्यकाल के दौरान टिकटॉक पर बैन लगाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन अब उन्होंने इस मुद्दे पर नया रुख अपनाया है।
ट्रंप की नई रणनीति
डोनाल्ड ट्रंप ने अब सीधे चीन से सौदेबाजी करने का संकेत दिया है। उनका कहना है कि अगर चीन टिकटॉक डील कराने में मदद करता है, तो वह चीनी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ में छूट देने पर विचार कर सकते हैं। यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि ट्रंप ने अपने कार्यकाल में चीन पर कड़े टैरिफ लगाए थे, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध शुरू हो गया था।
ट्रंप के इस बयान के पीछे कई रणनीतिक कारण हो सकते हैं –
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चीन पर दबाव बढ़ाना: ट्रंप यह दिखाना चाहते हैं कि अगर चीन टिकटॉक डील को तेजी से करवाए, तो उसे व्यापारिक मोर्चे पर राहत मिल सकती है।
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अमेरिकी टेक कंपनियों को बढ़त दिलाना: अगर टिकटॉक को अमेरिकी कंपनियों के हाथों बेचा जाता है, तो यह सिलिकॉन वैली के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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चुनावी राजनीति: ट्रंप इस साल के राष्ट्रपति चुनाव में बाइडेन को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। टिकटॉक को लेकर उन्होंने जो नया दांव चला है, वह उनके चुनाव प्रचार का भी हिस्सा हो सकता है।
क्या चीन झुकेगा?
ट्रंप के इस ऑफर पर चीन की प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि बीजिंग इतनी आसानी से झुकेगा। चीन के लिए टिकटॉक सिर्फ एक सोशल मीडिया ऐप नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में उसकी बढ़ती ताकत का प्रतीक भी है।
चीन पहले ही संकेत दे चुका है कि वह टिकटॉक की जबरन बिक्री को पसंद नहीं करेगा। अगर ट्रंप का ऑफर काम करता है, तो चीन के लिए यह अमेरिका से व्यापारिक सौदा करने का एक नया मौका हो सकता है। लेकिन अगर बीजिंग इस डील से पीछे हटता है, तो अमेरिका में टिकटॉक के बैन होने की संभावना और बढ़ सकती है।
आगे क्या?
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अगर ट्रंप की योजना काम करती है, तो टिकटॉक का मालिकाना हक जल्द ही बदल सकता है।
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अगर चीन सहमत नहीं होता, तो अमेरिका में टिकटॉक पर प्रतिबंध लग सकता है।
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यह मुद्दा अमेरिका-चीन व्यापारिक संबंधों को और जटिल बना सकता है।
आने वाले दिनों में ट्रंप की इस नई चाल का क्या असर पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।





