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गणित की दुनिया में सारा पेलुस का बड़ा मुकाम रामानुजन पुरस्कार के लिए चयन

Ratna Netam
25 Sept 2026 4:43 PM IST
गणित की दुनिया में सारा पेलुस का बड़ा मुकाम  रामानुजन पुरस्कार के लिए चयन
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वाशिंगटन। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में गणित की एसोसिएट प्रोफेसर सारा पेलुस को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित SASTRA-रामानुजन पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें गणित के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए यह सम्मान दिया जाएगा। पेलुस ने विशेष रूप से एडिटिव कॉम्बिनेटरिक्स में उल्लेखनीय काम किया है, जबकि उनकी रिसर्च एनालिटिक नंबर थ्योरी सहित गणित के कई क्षेत्रों तक फैली हुई है। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय ने 24 सितंबर को उनके चयन की पुष्टि की।SASTRA-रामानुजन पुरस्कार युवा गणितज्ञों को दिया जाने वाला प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। इसे वर्ष 2005 में SASTRA डीम्ड यूनिवर्सिटी ने शुरू किया था। पुरस्कार के लिए अधिकतम आयु सीमा 32 वर्ष रखी गई है। यह सीमा महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जीवन को ध्यान में रखते हुए तय की गई, जिनका निधन 32 वर्ष की आयु में हुआ था। पुरस्कार के तहत 10 हजार अमेरिकी डॉलर और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।
सारा पेलुस के चयन में उनके एडिटिव कॉम्बिनेटरिक्स से जुड़े शोध को खास तौर पर रेखांकित किया गया है। स्टैनफोर्ड के अनुसार, उनके काम में पॉलिनोमियल प्रोग्रेशंस, एर्गोडिक एवरेज के पॉइंटवाइज कन्वर्जेंस और इंटीजर डिस्टेंस सेट जैसी जटिल गणितीय समस्याओं पर महत्वपूर्ण परिणाम शामिल हैं। इन विषयों पर उनके शोध ने आधुनिक कॉम्बिनेटरिक्स और नंबर थ्योरी में नई तकनीकों तथा दृष्टिकोणों को आगे बढ़ाया है।पेलुस की शैक्षणिक यात्रा भी इस सम्मान को खास बनाती है। उन्होंने 2019 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी की थी। उनकी पीएचडी का विषय “Bounds for sets with no nontrivial polynomial progressions” था और उनके शोध सलाहकार जाने-माने गणितज्ञ प्रोफेसर कन्नन सुंदरराजन थे। पीएचडी के बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में NSF पोस्टडॉक और इसके बाद प्रिंसटन यूनिवर्सिटी तथा इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडी से जुड़े पदों पर काम किया।
इस पुरस्कार के साथ एक दिलचस्प ऐतिहासिक संयोग भी जुड़ा है। पेलुस के पीएचडी सलाहकार कन्नन सुंदरराजन स्वयं पहले SASTRA-रामानुजन पुरस्कार के विजेता रह चुके हैं। वर्ष 2005 में जब यह पुरस्कार पहली बार दिया गया था, तब सुंदरराजन और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के गणितज्ञ मंजुल भार्गव को संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया था। अब 2026 में उनकी छात्रा सारा पेलुस को वही पुरस्कार मिलने जा रहा है। इस तरह पुरस्कार के इतिहास में गुरु और उनकी पीएचडी छात्रा दोनों इस सम्मान के प्राप्तकर्ता बन गए हैं। दोनों पुरस्कारों के बीच 21 वर्षों का अंतर है।पेलुस की रिसर्च का दायरा काफी व्यापक है। स्टैनफोर्ड के आधिकारिक प्रोफाइल में उनके प्रमुख शोध क्षेत्रों में कॉम्बिनेटरिक्स और नंबर थ्योरी तथा विशेष रुचियों में एनालिटिक नंबर थ्योरी और एडिटिव कॉम्बिनेटरिक्स शामिल हैं। उनके काम ने एर्गोडिक थ्योरी और रिप्रेजेंटेशन थ्योरी जैसे क्षेत्रों को भी छुआ है।
उनकी उपलब्धियों को इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित सम्मानों से पहचान मिल चुकी है। पेलुस को Sloan Research Fellowship, Maryam Mirzakhani New Frontiers Prize, Dénes König Prize और Salem Prize मिल चुके हैं। उन्हें 2026 AWM Microsoft Research Prize in Algebra and Number Theory के लिए भी चुना गया। एसोसिएशन फॉर वीमेन इन मैथमेटिक्स ने उनके शोध में नए परिणामों, रचनात्मक तरीकों और कई गणितीय क्षेत्रों में व्यापक काम को रेखांकित किया था।SASTRA-रामानुजन पुरस्कार का उद्देश्य उन युवा शोधकर्ताओं को सम्मानित करना है, जिन्होंने श्रीनिवास रामानुजन से व्यापक रूप से प्रभावित गणितीय क्षेत्रों में असाधारण योगदान दिया है। वर्ष 2005 से यह पुरस्कार लगातार युवा गणितज्ञों को दिया जा रहा है। 2025 में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के अलेक्जेंडर स्मिथ को इस पुरस्कार के लिए चुना गया था, जबकि इससे पहले अलेक्जेंडर डन, रुईशियांग झांग और युनकिंग तांग जैसे गणितज्ञ भी इसके प्राप्तकर्ता रहे हैं।
सारा पेलुस को यह पुरस्कार दिसंबर में भारत में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदान किया जाएगा। स्टैनफोर्ड के अनुसार, 20 से 22 दिसंबर 2026 के बीच तमिलनाडु के कुंभकोणम स्थित SASTRA यूनिवर्सिटी के श्रीनिवास रामानुजन सेंटर में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस इन नंबर थ्योरी आयोजित होगी। इसी सम्मेलन में उन्हें 2026 SASTRA-रामानुजन पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। कुंभकोणम महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का गृह नगर भी है।सारा पेलुस का चयन युवा गणितज्ञ के रूप में उनके शोध की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करता है। खास बात यह है कि जिस सम्मान को उनके पीएचडी सलाहकार कन्नन सुंदरराजन ने इसकी शुरुआत के वर्ष 2005 में हासिल किया था, वही पुरस्कार अब 2026 में उनकी छात्रा को मिलने जा रहा है। गणित के क्षेत्र में गुरु और शिष्या की यह उपलब्धि SASTRA-रामानुजन पुरस्कार के इतिहास में एक उल्लेखनीय अध्याय जोड़ती है।
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