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संसद में हार के बाद सांचेज का बड़ा फैसला, स्पेन में जल्दी होंगे चुनाव

nidhi
6 Oct 2026 9:00 AM IST
संसद में हार के बाद सांचेज का बड़ा फैसला, स्पेन में जल्दी होंगे चुनाव
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किराया संकट और सड़कों पर प्रदर्शन
मैड्रिड: स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने देश में समय से पहले आम चुनाव कराने का एलान कर दिया है। चुनाव 29 नवंबर 2026 को होंगे। यह फैसला तय समय से करीब आठ महीने पहले लिया गया है और ऐसे समय आया है जब देश गंभीर आवासीय संकट, किराए में बढ़ोतरी और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है।
सरकार पर दबाव उस समय और बढ़ गया जब संसद ने आवास संकट से निपटने के लिए लाए गए दो आपात प्रस्तावों को खारिज कर दिया। इन प्रस्तावों में कमजोर वर्गों को बेदखली से राहत, किराए से जुड़ी सुरक्षा और अस्थायी किराये पर नए नियम शामिल थे। संसद में हार के बाद सांचेज ने अपने मंत्रियों और सोशलिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की और अंततः संसद भंग कर चुनाव कराने का फैसला किया।
स्पेन में पिछले कई दिनों से आवास की बढ़ती कीमतों और किराए को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। 3 अक्टूबर को मैड्रिड समेत कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने किफायती आवास, किराएदारों को ज्यादा सुरक्षा और सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की। मैड्रिड में प्रदर्शन के दौरान तनाव की स्थिति भी बनी और पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आईं।
आवास संकट इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है। स्पेन में घरों की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है, जबकि बड़े शहरों और पर्यटन क्षेत्रों में किराया लगातार बढ़ा है। सामाजिक आवास का हिस्सा भी यूरोपीय संघ के औसत से काफी कम है। इस वजह से खासकर युवाओं और किराए पर रहने वाले परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
सांचेज की सरकार संसद में पहले से ही कमजोर बहुमत पर निर्भर थी और उसे कई कानून पारित कराने के लिए छोटे क्षेत्रीय दलों का समर्थन लेना पड़ता था। हाल के महीनों में भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप, सेउटा में प्रवासन संकट और गठबंधन सहयोगियों के साथ मतभेदों ने सरकार की राजनीतिक स्थिति को और जटिल बनाया है।
विपक्षी पीपुल्स पार्टी के नेता अल्बर्टो नुनेज फेइजो ने समय से पहले चुनाव के फैसले का स्वागत किया है। वहीं प्रधानमंत्री सांचेज चुनाव को आवास, सामाजिक न्याय और कल्याणकारी नीतियों के मुद्दों पर जनता का नया जनादेश हासिल करने के अवसर के रूप में पेश कर रहे हैं।
हालांकि सरकार को “बैकफुट” पर बताना एक राजनीतिक व्याख्या है। तथ्य यह है कि सरकार को संसद में आवास से जुड़े प्रस्तावों पर हार का सामना करना पड़ा, बड़े विरोध प्रदर्शन हुए और इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने समय से पहले चुनाव की घोषणा की। चुनाव परिणाम ही तय करेंगे कि जनता इन मुद्दों पर किस दिशा में जनादेश देती है।
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