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प्रसूता के मामले से मचा हड़कंप
मुंगेर: बिहार के मुंगेर सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक प्रसूता को मृत भ्रूण के साथ अस्पताल पहुंचने के बावजूद कथित तौर पर भर्ती नहीं किए जाने और वापस भेजे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल से बाहर निकलते ही महिला और उसके परिजनों को निजी अस्पतालों से जुड़े कथित दलालों ने घेर लिया और निजी संस्थानों में इलाज कराने का दबाव बनाने लगे।
घटना ने सरकारी अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं को मिलने वाली आपात चिकित्सा सुविधा और रेफरल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गर्भावस्था के दौरान मृत भ्रूण की स्थिति में महिला को तत्काल चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत हो सकती है। ऐसे में मरीज को बिना पर्याप्त मूल्यांकन लौटाने का आरोप बेहद गंभीर माना जा रहा है।
मुंगेर सदर अस्पताल की व्यवस्था को लेकर हाल के दिनों में दूसरी शिकायतें भी सामने आई हैं। अस्पताल में कई पैथोलॉजी जांच उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को निजी जांच केंद्रों की ओर जाना पड़ रहा है। इससे मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर भी सवाल उठे हैं। मुंगेर में सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच कथित दलाली का मुद्दा भी पहले उठ चुका है। जनवरी 2026 के एक मामले में आरोप लगाया गया था कि सदर अस्पताल के बाहर निजी अस्पतालों की एंबुलेंस खड़ी रहती हैं और मरीजों को निजी संस्थानों की ओर ले जाने की कोशिश की जाती है। उस मामले के बाद प्रशासनिक जांच और कार्रवाई की मांग उठी थी।
ताजा मामले में अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि महिला को अस्पताल में किस डॉक्टर या कर्मचारी ने देखा, उसे भर्ती क्यों नहीं किया गया और क्या उसे किसी अन्य संस्थान के लिए औपचारिक रेफरल दिया गया था। साथ ही अस्पताल के बाहर मौजूद कथित दलाल कौन थे और उनका किसी निजी अस्पताल से संबंध था या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है।
ऐसी घटनाओं में प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल मरीज की सुरक्षा और जवाबदेही का होता है। गर्भवती या प्रसूता महिला को गंभीर स्थिति में अस्पताल से लौटाना उसके स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि अस्पताल की ओर से निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।
सदर अस्पताल सेंट्रल NQAS सर्टिफिकेशन की तैयारी भी कर रहा है, जिसके तहत अस्पताल की सेवाओं, गुणवत्ता और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का मूल्यांकन होना है। ऐसे समय में मरीजों से जुड़ी इस तरह की शिकायतें स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करती हैं। फिलहाल मामले में अस्पताल प्रशासन की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और साफ होगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों और कथित दलाल नेटवर्क की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी।
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