विश्व
लंदन में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन सिंध के अधिकारों की उठी मांग
Ratna Netam
16 Oct 2026 5:11 PM IST

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लंदन। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में कथित मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक उपेक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के शोषण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई गई है। ब्रिटेन की राजधानी लंदन में आयोजित 38वें अंतरराष्ट्रीय सिंध सम्मेलन में 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। सम्मेलन में सिंध की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा और वहां के लोगों के लिए आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सिंध के प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण बढ़ाने और उसकी सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं।वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस (WSC) द्वारा 10 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर के हैरो कैंपस में आयोजित सम्मेलन में ब्रिटेन, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का विषय 'सिंध का आत्मनिर्णय का अधिकार: शांति, लोकतंत्र और स्थायी भविष्य की ओर रास्ते' रखा गया था।
सिंध के विभाजन और कराची को अलग करने का विरोध
सम्मेलन में प्रतिनिधियों ने सिंध को छोटी प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित करने तथा कराची को प्रांत से अलग करने के प्रस्तावों का कड़ा विरोध किया।प्रतिनिधियों का आरोप था कि इस प्रकार के कदम सिंधी समुदाय की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि सिंध की क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकारों को सुरक्षित रखने की मांग की गई।वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि प्रशासनिक पुनर्गठन के प्रस्तावों के पीछे संसाधनों पर केंद्रीय नियंत्रण मजबूत करने की मंशा हो सकती है।
सिंधु नदी पर प्रस्तावित नहरों को लेकर चिंता
सम्मेलन में सिंधु नदी से पानी मोड़ने के लिए प्रस्तावित नहर परियोजनाओं का भी विरोध किया गया।प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि इन परियोजनाओं से नदी के निचले हिस्सों में रहने वाले समुदायों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।उनका कहना था कि सिंधु नदी पर निर्भर किसानों और स्थानीय आबादी के लिए पानी की उपलब्धता पहले से महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। ऐसे में नई नहर परियोजनाएं सिंधु डेल्टा के पर्यावरण को और नुकसान पहुंचा सकती हैं।प्रतिनिधियों ने जल संसाधनों के न्यायसंगत वितरण और पर्यावरण संरक्षण की मांग उठाई।
बलूच और पश्तून संगठनों ने भी जताया समर्थन
सम्मेलन में बलूच और पश्तून राजनीतिक तथा मानवाधिकार संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।इनमें बलूच नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष डॉ. नसीम बलूच, बलूच मानवाधिकार केंद्र के प्रतिनिधि डॉ. नसीर दश्ती और पश्तून तहफुज मूवमेंट के शाहिद खान काकर शामिल थे।उन्होंने सिंध के लोगों के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए राजनीतिक उपेक्षा, संसाधनों के शोषण और कथित सरकारी दमन से जुड़ी चिंताओं को साझा किया।
बच्चों में कुपोषण और बाढ़ प्रभावितों की समस्याओं पर चर्चा
सम्मेलन में सिंध की सामाजिक और मानवीय समस्याओं को भी प्रमुखता दी गई।बाल चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. नील कंठ ने बच्चों में कुपोषण और शारीरिक विकास प्रभावित होने की समस्या पर चिंता जताई।वहीं, महा पन्हवार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास कार्यों की धीमी गति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विस्थापन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण प्रभावित परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।प्रतिनिधियों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी नीतियां बनाने की आवश्यकता बताई।
सम्मेलन में पारित हुआ 10 सूत्रीय प्रस्ताव
वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस के नेता उमेद लघारी ने सम्मेलन में 10 सूत्रीय प्रस्ताव प्रस्तुत किया।इस प्रस्ताव में सिंध के आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग दोहराई गई। साथ ही ग्रीन पाकिस्तान पहल के तहत कॉर्पोरेट खेती और भूमि अधिग्रहण का विरोध किया गया।प्रतिनिधियों ने जबरन गुमशुदगी, महिलाओं के खिलाफ कथित सरकारी हिंसा और अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के जबरन धर्मांतरण की घटनाओं की निंदा की।प्रस्ताव में प्रिया कुमारी सहित अपहृत बच्चों की बरामदगी और कारूंझर पहाड़ियों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग भी की गई।
लोकतांत्रिक तरीके से मांग उठाने का संकल्प
वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. लखू लुहाना ने कहा कि सिंध की क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।उन्होंने लोकतांत्रिक भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय मंचों के माध्यम से संगठन की मांगों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।सम्मेलन में पाकिस्तान से जुड़े राजनीतिक और मानवाधिकार मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की अपील की गई। हालांकि, प्रतिनिधियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
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