
पाकिस्तान | पाकिस्तान सरकार ने देश में रह रहे अवैध अफगान शरणार्थियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की योजना तैयार कर ली है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जिनके पास कानूनी दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें जल्द ही पाकिस्तान छोड़ना होगा। इस फैसले से हजारों अफगान नागरिक प्रभावित होंगे, जो पिछले कई दशकों से पाकिस्तान में रह रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अवैध रूप से रह रहे लोगों पर सुरक्षा और आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप है, जिससे निपटने के लिए अब निर्णायक कदम उठाया जाएगा।
पाकिस्तान में करीब 40 लाख अफगान शरणार्थी रहते हैं, जिनमें से लगभग 17 लाख अवैध रूप से बसे हुए हैं। सरकार का कहना है कि इनमें से कई लोग अवैध गतिविधियों, तस्करी और आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है। हाल ही में पाकिस्तान में आतंकी घटनाएं बढ़ी हैं, जिनका संबंध अफगानिस्तान से जुड़े आतंकवादी समूहों से बताया जा रहा है। सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया है और अवैध अफगानों को पाकिस्तान छोड़ने के लिए आखिरी मौका दिया है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, जिन अफगानों के पास वैध दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें डिटेंशन सेंटर में भेजकर देश से बाहर निकाला जाएगा। सरकार पहले ही एक लाख से ज्यादा अफगानों को निर्वासित कर चुकी है, और आने वाले हफ्तों में यह संख्या और बढ़ सकती है। सरकार ने यह भी कहा है कि महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों के साथ नरमी बरती जाएगी, लेकिन जो लोग आदेश का पालन नहीं करेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने पाकिस्तान से शरणार्थियों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है। दूसरी ओर, तालिबान सरकार ने इस कदम की निंदा करते हुए इसे अमानवीय बताया है। अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान को शरणार्थियों के प्रति नरमी बरतनी चाहिए और उन्हें जबरन वापस भेजने से बचना चाहिए।
पाकिस्तान सरकार ने अपनी सफाई में कहा है कि जो अफगान नागरिक कानूनी दस्तावेजों के साथ रह रहे हैं, उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। सरकार का मुख्य मकसद गैर-कानूनी रूप से रह रहे लोगों को बाहर निकालकर देश में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। हालांकि, इस कदम से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में तनाव और बढ़ सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या पाकिस्तान अपने फैसले पर कायम रहता है या अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते कोई नया समाधान निकालता है।





