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Nigeria : आईएमएन पर प्रतिबंध के बावजूद तनाव

Uma Verma
30 March 2025 8:55 AM IST
Nigeria : आईएमएन पर प्रतिबंध के बावजूद तनाव
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वर्ल्ड | नाइजीरिया में इस्लामिक मूवमेंट ऑफ नाइजीरिया (आईएमएन) और सरकार के बीच लंबे समय से चला आ रहा टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार ने 2019 में इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन इसके समर्थकों के विरोध प्रदर्शन और सुरक्षाबलों के साथ झड़पें आज भी जारी हैं। आईएमएन खुद को एक शांतिपूर्ण धार्मिक संगठन बताता है, लेकिन नाइजीरियाई सरकार इसे चरमपंथी गतिविधियों से जुड़ा संगठन मानती है, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

आईएमएन का उदय और विचारधारा

आईएमएन शिया इस्लामिक संगठन है, जो नाइजीरिया के लगभग 5% शिया मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करता है। इसका गठन 1980 के दशक में हुआ था और यह ईरान की इस्लामिक क्रांति से प्रभावित है। संगठन के नेता शेख इब्राहिम ज़कज़की ने नाइजीरिया को एक इस्लामिक स्टेट में बदलने की वकालत की, लेकिन सरकार ने इसे देश की धर्मनिरपेक्ष राजनीति के लिए खतरा माना।

आईएमएन का दावा है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से इस्लामिक व्यवस्था लागू करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन नाइजीरियाई प्रशासन इसे ईरान समर्थित संगठन मानता है, जो देश में धार्मिक उग्रवाद को बढ़ावा दे सकता है।

सरकार और आईएमएन के बीच टकराव क्यों?

2015 में सरकार और आईएमएन के बीच टकराव तब गंभीर हो गया, जब सेना ने आईएमएन के एक जुलूस पर कार्रवाई की। इसमें सैकड़ों लोग मारे गए और आईएमएन नेता शेख ज़कज़की को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद से ही संगठन के समर्थक लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिन्हें सरकार हिंसक बताकर दबाने की कोशिश कर रही है।

सरकार का कहना है कि आईएमएन कानून व्यवस्था के लिए खतरा है, क्योंकि इसके समर्थकों के प्रदर्शनों में अक्सर हिंसा भड़क उठती है। कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हो चुकी हैं, जिनमें आम नागरिकों की भी मौत हुई है।

सरकार की सख्ती और आईएमएन की प्रतिक्रिया

2019 में सरकार ने आईएमएन को आधिकारिक तौर पर प्रतिबंधित कर दिया।

शेख ज़कज़की को जेल में रखा गया, जिससे समर्थकों में रोष बढ़ा।

आईएमएन के कई विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस ने आंसू गैस और बल प्रयोग किया, जिससे झड़पें बढ़ीं।

सरकार ने आईएमएन को विदेशी शक्तियों (ईरान) से जुड़े होने का आरोप लगाया।

दूसरी ओर, आईएमएन समर्थकों का कहना है कि सरकार उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही है और शिया समुदाय के साथ भेदभाव कर रही है। उनका कहना है कि वे अपने नेता की रिहाई और धार्मिक स्वतंत्रता की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

क्या आगे भी जारी रहेगा टकराव?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार और आईएमएन के बीच कोई राजनीतिक समाधान नहीं निकला, तो नाइजीरिया में धार्मिक और सामाजिक अशांति बढ़ सकती है।

अगर शेख ज़कज़की को रिहा नहीं किया गया तो आईएमएन के प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं।

सरकार की सख्ती के चलते हिंसा बढ़ने की आशंका है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दबाव सरकार पर बढ़ सकता है।

नाइजीरिया में पहले से ही आतंकवाद और सांप्रदायिक संघर्ष की समस्या है, और आईएमएन पर कार्रवाई से हालात और जटिल हो सकते हैं। सरकार को चाहिए कि वह सभी पक्षों से बातचीत कर शांतिपूर्ण समाधान निकाले, ताकि देश में स्थिरता बनी रहे।

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