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शांति की सोच रखने वाले PM मोदी ट्रंप को पछाड़ रहे

Nilmani Pal
13 March 2026 3:24 PM IST
शांति की सोच रखने वाले PM मोदी ट्रंप को पछाड़ रहे
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ट्रंप अपनी लड़ाई सोच के चलते विश्व स्तर पर ग्राफ खुद ही गिरा रहे है, पीएम मोदी बड़े लीडर बनकर उभर रहे है, क्योंकि पीएम मोदी हमेशा शांति बनाए रखने देशों से अपील करते रहते है...केंद्रीय नेतृत्व में इसलिए आगे पायदान पर है...

दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन से फोन पर सीधी बात की है. इस बातचीत में पीएम मोदी ने बेहद सख्त और स्पष्ट लहजे में आम नागरिकों की मौत और नागरिक बुनियादी ढांचे को पहुंच रहे नुकसान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. प्रधानमंत्री ने साफ किया कि किसी भी युद्ध में बेगुनाह लोगों और सार्वजनिक संपत्ति को निशाना बनाना अस्वीकार्य है.

प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में हिंसा के बढ़ते स्तर पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे जैसे बिजली, पानी और परिवहन प्रणालियों को नष्ट करना वैश्विक संकट को और गहरा रहा है. पीएम ने जोर देकर कहा कि इस तनाव की सबसे बड़ी कीमत आम जनता चुका रही है, जो कि चिंताजनक है. उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति से तुरंत हिंसा रोकने और ‘डिप्लोमेसी’ (कूटनीति) की मेज पर लौटने का आग्रह किया.

दरअसल, ईरान ने आधिकारिक बयान में जो बातें कहीं, वह भारत की आलोचना करने वालों को करारा जवाब है. ईरान जंग पर भारत के स्टैंड की कुछ लोग आलोचना कर रहे थे. मगर अब ईरान ने खुद बता दिया है कि भारत ने बैकडोर से उसके लिए क्या किया. भारत ने ईरान जंग खत्म करने की पूरी कोशिश की. अब भी कर रहा है. भारत ने रचनात्मक भूमिका निभाई है. ईरान के बयान की एक-एक बात में भारत की ग्लोबल धमक की छाप दिखती है.

ईरान-अमेरिका तनाव पर पुीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान के बीच गुरुवार की रात को फोन पर बातचीत हुई. इस दौरान ईरान ने कहा कि भारत ने संतुलित भूमिका निभाई और भारत ने कहा है कि ईरान दोस्त है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने फोन पर हुई बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संतुलित और रचनात्मक भूमिका निभाई है और तनाव कम करने की कोशिश की है.

पेजेशकियान ने कहा कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत के रास्ते पर था और कूटनीति से मुद्दों को हल करना चाहता था. लेकिन इसी बीच अमेरिका और इजराइल ने हमला कर दिया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के खिलाफ है. इस हमले में इस्लामी क्रांति के नेता, कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और मिनाब के एक स्कूल के 168 मासूम छात्र मारे गए. उन्होंने कहा कि मारे गए नेता सिर्फ राजनीतिक नेता ही नहीं बल्कि दुनिया भर के मुसलमानों के आध्यात्मिक नेता भी थे, इसलिए उनके खून का न्याय मांगना पूरी इस्लामी उम्मा का अधिकार है. पेजेशकियान ने कहा कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया और वह इसे आगे बढ़ाना भी नहीं चाहता. लेकिन आत्मरक्षा के अपने अधिकार के तहत ईरान ने उन देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जहां से हमले हुए थे.

उन्होंने इजराइल द्वारा निर्दोष लोगों की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए इसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद बताया. साथ ही कहा कि ईरान क्षेत्र में अस्थिरता नहीं चाहता. हालिया हमलों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने के बावजूद ईरान भारत और अन्य मित्र देशों के साथ ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों के जरिए सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.

टोनी एबॉट ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना की

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि 10 साल से ज्यादा समय तक सत्ता में रहने के बावजूद, पीएम मोदी ने खुद को 'सत्ता के अहंकार' (घमंड) से दूर रखा है।भारत ने हाल ही में रायसीना डायलॉग 2026 के 11वें संस्करण का आयोजन किया था। इसकी अहमियत पर बात करते हुए ऑस्ट्रेलियाई पूर्व पीएम एबॉट ने यह बात कही। रणनीतिक फोरम की बढ़ती वैश्विक अहमियत, इसकी शुरुआत और भारत की विदेश नीति में नेतृत्व की भूमिका पर बात करते हुए एबॉट ने कहा, “2016 से हर मार्च में दिल्ली में रायसीना डायलॉग होता आ रहा है। यह नरेंद्र मोदी के लंबे समय तक विदेश मंत्री रहे सुब्रह्मण्यम जयशंकर का विचार है। दूसरे ग्लोबल जमावड़ों की तरह, यह राजनीतिक नेताओं, वरिष्ठ सैन्य कमांडर्स, जाने-माने बिजनेसमैन, जाने-माने पत्रकारों और थिंक टैंक प्रमुखों को जरूरी मुद्दों पर बात करने के लिए एक साथ लाता है; लेकिन यह दावोस से बेहतर है क्योंकि यह असल में मेजबानी करने वाली सरकार की सराहना करने का अभियान नहीं है।”

एबॉट ने पीएम मोदी के नेतृत्व की स्टाइल और आज दुनिया के सबसे असरदार नेताओं में से एक होने के बावजूद ग्लोबल आवाजों को सुनने की उनकी इच्छा की सराहना की। हर साल डायलॉग के ओपनिंग सेशन में प्रधानमंत्री की मौजूदगी का जिक्र करते हुए, एबॉट ने कहा, “अब तक हर डायलॉग में, प्रधानमंत्री मोदी ने ओपनिंग सेशन में आकर, मुख्य मेहमान को सुनकर मिसाल कायम की है, पिछले साल न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री और इस साल फिनलैंड के राष्ट्रपति, लेकिन खुद नहीं बोले।”

एबॉट ने कहा कि पीएम मोदी आज दुनिया के तीसरे सबसे ताकतवर नेता हैं। अमेरिका और चीन के राष्ट्रपति के बाद, वह शायद दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान हैं, फिर भी वह नेतृत्व करने का घमंड नहीं करते और दूसरों को सुनने की कला भी रखते हैं। एक दशक से ज्यादा ऑफिस में रहने के बावजूद, शायद हिंदू साधु की तरह अपने युवावस्था के अनुभवों के कारण, अब तक सत्ता के अहंकार से खुद को दूर रखने में सफल रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम ने कुछ इंटरनेशनल ऑब्जर्वर की इस आलोचना को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी सरकार के तहत भारत कम लोकतांत्रिक हो गया है। उन्होंने कहा, “जहां तक इस सोच की बात है कि भाजपा के राज में भारत किसी तरह एक तानाशाही देश बन गया है, यह पूरी तरह से बकवास है। जिस देश में आजाद और निष्पक्ष चुनाव, पूरी तरह से आजाद मीडिया और मजबूती से आजाद न्यायपालिका हो, वहां तानाशाही का गंभीर खतरा नहीं है। और कोई भी तानाशाही ऐसी ग्लोबल कॉन्फ्रेंस नहीं करेगी जहां कुछ भी मना न हो और किसी को चुप न कराया जाए। आखिरकार, इस साल की बातचीत में इजरायली विदेश मंत्री (वर्चुअली) और ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री दोनों ने हिस्सा लिया।”

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