
अमेंरिका। ट्रंप की शर्तों पर ईरान की असहमति के चलते अमेरिका और ईरान के बीच शांति का फैसला टला। आज से हार्मुज में अमेरिका नौसेना का बड़ा आपरेशन शुरू होगा। अमेरिकी नौसेना के सेंट्रल कमांड (US Navy Central Command) और यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने अभी-अभी होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सभी जहाज़ों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है कि वहाँ जल्द ही अमेरिकी सेना के बड़े सैन्य अभियान चलाए जाएंगे। चेतावनी में ईरान पर “खतरनाक और अवैध रूप से समुद्री बारूदी सुरंगें (mines) बिछाने” का आरोप लगाया गया है।
इसमें कहा गया है कि संभावित ईरानी जवाबी कार्रवाई की आशंका के कारण अमेरिकी बल “ईरानी हमले के प्रति उच्च सतर्कता (high alert)” पर हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि कोई भी पोत (vessel) जो इस अभियान में बाधा डालेगा या “बारूदी सुरंग बिछाने की गतिविधियों का समर्थन करेगा”, उसे अमेरिकी बलों द्वारा निशाना बनाया जाएगा।
सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएई ने ईरान के खिलाफ इस सैन्य अभियान के लिए अमेरिका और इजरायल के साथ कड़ा समन्वय किया था। हैरान करने वाली बात यह है कि युद्धविराम की घोषणा के बाद भी यह अभियान कई हफ्तों तक जारी रहा। अन्य खाड़ी देशों ने ईरान के साथ सीधे टकराव से बचने और अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का उपयोग न होने देने का रुख अपनाया था, वहीं यूएई ने बेहद आक्रामक भूमिका चुनी।
सऊदी अरब के साथ मतभेद
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि संघर्ष के शुरुआती दौर में यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के प्रति नाराजगी जताई थी, क्योंकि रियाद ने ईरान विरोधी इस सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया था। सऊदी अरब ने बाद में वाशिंगटन के सामने यह चिंता जताई कि यूएई के इन हमलों से पूरे खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ठिकानों पर ईरान के जवाबी हमलों का खतरा बढ़ रहा है। सऊदी ने अमेरिका से इन समन्वित सैन्य कार्रवाइयों को रुकवाने का आग्रह भी किया था।





