
वर्ल्ड | पाकिस्तान में अदालत ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि पति की दूसरी शादी अपने आप तलाक का आधार नहीं बन सकती। यानी, पहली पत्नी अपने पति की दूसरी शादी के कारण तलाक की हकदार नहीं होगी, जब तक कि अन्य ठोस कारण न हों।
क्या कहा अदालत ने?
पाकिस्तान की एक हाईकोर्ट ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस्लामी कानून के तहत पुरुषों को बहुविवाह की अनुमति है, और यह पहली पत्नी के तलाक का स्वतः आधार नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि अगर किसी महिला को तलाक चाहिए, तो उसे अन्य वैध कारणों का हवाला देना होगा, जैसे कि पति की क्रूरता, आर्थिक उपेक्षा या अन्य वैध कानूनी आधार।
कानूनी स्थिति क्या कहती है?
पाकिस्तान में मुस्लिम फैमिली लॉ ऑर्डिनेंस, 1961 के तहत पुरुष को दूसरी शादी से पहले पहली पत्नी से अनुमति लेनी होती है।
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अगर बिना अनुमति दूसरी शादी होती है, तो पति को जुर्माना या सजा हो सकती है, लेकिन शादी रद्द नहीं होगी।
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पहली पत्नी इस आधार पर तलाक का दावा नहीं कर सकती, जब तक कि अन्य वैध कारण न हों।
महिलाओं के अधिकारों पर बहस
इस फैसले के बाद महिला अधिकार संगठनों ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह फैसला महिलाओं के अधिकारों को कमजोर करता है और उन्हें असमान स्थिति में डालता है।
एक महिला कार्यकर्ता ने कहा, "पति को दूसरी शादी के लिए अनुमति लेने की बाध्यता है, लेकिन अगर वह इसका उल्लंघन करता है, तो पत्नी को तलाक का अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए?"
धार्मिक संगठनों का समर्थन
वहीं, इस्लामिक संगठनों और पारंपरिक विचारधारा के लोगों ने इस फैसले का समर्थन किया है। उनका मानना है कि इस्लाम में बहुविवाह की इजाजत दी गई है और इसे कानून के जरिए रोका नहीं जा सकता।
आगे क्या?
यह फैसला बहस का विषय बना हुआ है। महिला अधिकार संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है। अगर यह मामला बड़ी अदालत में जाता है, तो पाकिस्तान में तलाक और बहुविवाह से जुड़े कानूनों पर व्यापक चर्चा हो सकती है।





