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पाकिस्तान में 2025 में बाल शोषण के मामलों में 8% की वृद्धि दर्ज: Report

Gulabi Jagat
16 March 2026 3:11 PM IST
पाकिस्तान में 2025 में बाल शोषण के मामलों में 8% की वृद्धि दर्ज: Report
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Islamabad : बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था 'साहिल' द्वारा जारी नए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों में आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, और पूरे देश में कुल 3,630 घटनाएं दर्ज की गई हैं।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, संस्था ने बताया कि ये आंकड़े पाकिस्तान के चारों प्रांतों के साथ-साथ इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी, पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान के 81 अखबारों में प्रकाशित रिपोर्टों से जुटाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों में लड़कियों की संख्या 1,924 (53 प्रतिशत) थी, जबकि 1,625 मामलों (47 प्रतिशत) में लड़के शामिल थे। इसके अलावा, 116 मामलों में नवजात शिशु शामिल थे, जो अलग-अलग उम्र के बच्चों की असुरक्षा को उजागर करता है।
दर्ज किए गए अपराधों में, अपहरण सबसे आम श्रेणी थी, जिसके 1,107 मामले सामने आए; इसके बाद अप्राकृतिक यौन शोषण (sodomy) के 596 मामले और बलात्कार के 522 मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट में लापता बच्चों के 365 मामले, बलात्कार के प्रयास के 195 मामले, अप्राकृतिक यौन शोषण के प्रयास के 141 मामले, सामूहिक अप्राकृतिक यौ
न शोषण
के 130 मामले और सामूहिक बलात्कार के 108 मामले भी दर्ज किए गए। अधिकारियों ने यौन शोषण के बाद हत्या के 58 मामले और बाल विवाह के 53 मामले भी दर्ज किए।
आंकड़ों से यह भी पता चला कि 11 से 15 वर्ष की आयु के बच्चे सबसे अधिक असुरक्षित थे, और इस आयु वर्ग में लड़कियों की तुलना में लड़के थोड़े अधिक प्रभावित थे। संस्था ने बताया कि कई मामलों में कथित अपराधी पीड़ितों के परिचित ही थे; बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार के मामलों में 'परिचित' श्रेणी सबसे अधिक बार सामने आई।
क्षेत्रवार बात करें तो, दर्ज किए गए मामलों में पंजाब का हिस्सा सबसे अधिक (73 प्रतिशत) था; इसके बाद सिंध (21 प्रतिशत), खैबर-पख्तूनख्वा (4 प्रतिशत) और बलूचिस्तान, संघीय क्षेत्रों, पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर तथा गिलगित-बाल्टिस्तान को मिलाकर कुल दो प्रतिशत मामले दर्ज किए गए।
ये निष्कर्ष पाकिस्तान में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मानवाधिकार समूहों की लगातार बनी चिंताओं को उजागर करते हैं, और साथ ही यह भी रेखांकित करते हैं कि पीड़ितों के लिए अधिक सशक्त निवारक उपायों, कानूनी सख्ती और सहायता प्रणालियों की कितनी आवश्यकता है। (ANI)
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