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'जल्द डेल्टा को पीछे छोड़ देगा ओमिक्रॉन', दुनिया के 110 से ज्यादा देशों में फैला

Neha Dani
30 Dec 2021 10:18 AM GMT
जल्द डेल्टा को पीछे छोड़ देगा ओमिक्रॉन, दुनिया के 110 से ज्यादा देशों में फैला
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ओमिक्रॉन वेरिएंट वो संक्रमण नहीं है, जो हमने पहली और दूसरी लहर के दौरान देखा था.

सिंगापुर (Singapore) में बुधवार को कोविड-19 (Covid-19) के 170 नए मामले सामने आए और एक्सपर्ट ने आगाह किया कि आने वाले महीनों में कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन (Coronavirus) डेल्टा वेरिएंट को पीछे छोड़ सकता है. सरकारी 'एजेंसी फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च बायोइन्फॉर्मेटिक्स इंस्टीट्यूट' के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर सेबेस्टियन मौरर-स्ट्रोह ने बताया कि डेल्टा (Delta Variant) अब भी अफ्रीका को छोड़कर बाकी महाद्वीप में आम तौर पर ज्यादा पाया जाने वाला वेरिएंट है लेकिन ओमिक्रॉन तेजी से फैल रहा है.

कोविड को लेकर जीनोम से संबंधित आंकड़े साझा करने वाले म्यूनिख स्थित 'जीसैड' के अनुसार पिछले महीने से उनके पास मंगलवार तक जो आंकड़े आए हैं, उनमें सात से 27 फीसदी मामलों में ओमिक्रॉन की पुष्टि हुई है. ये आंकड़े अफ्रीका को छोड़कर बाकी महाद्वीपों के संबंध में है. 'जीसैड' से जुड़े डॉक्टर मौरर स्ट्रोह को 'द स्ट्रैट्स टाइम्स' ने यह कहते हुए उद्धृत किया, 'मौजूदा आंकड़े से यह लगता है कि समय के साथ ओमिक्रॉन डेल्टा को पीछे छोड़ देगा.'
डेल्टा को पीछे छोड़ देंगे ओमिक्रॉन के मामले
कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron Variant) का सबसे पहले 11 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका में पता चला था. इसके बाद बोत्सवाना और हांगकांग में पता चला और पिछले सप्ताहांत तक यह दुनिया के 110 से ज्यादा देशों में फैल चुका है. ओमिक्रॉन ऑस्ट्रेलिया, भारत, रूस, दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन में फैल चुका है. राष्ट्रीय अस्पताल विश्वविद्यालय के संक्रामक रोगों प्रभाग के वरिष्ठ सलाहकार प्रोफेसर डेल फिशर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर डेल्टा से अब नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की तरफ मामले बढ़ रहे हैं क्योंकि यह वेरिएंट ज्यादा संक्रामक है. फिशर ने कहा कि इस क्षेत्र के ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि ओमिक्रॉन जल्द ही वैश्विक वर्चस्व के मामले में डेल्टा को पीछे छोड़ देगा.
भारत में जल्द आ सकती है तीसरी लहर!
वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामले कोविड की तीसरी लहर की वजह बन सकते हैं. हालांकि, इस वेरिएंट का प्रभाव पहली और दूसरी लहर की तरह भयावह नहीं होगा. एक्सपर्ट के मुताबिक, तीसरी लहर ज्यादा समय तक नहीं रहेगी. कहा जा रहा है कि अगले साल की शुरुआत में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है. इस बीच, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर जॉन बेल ने कहा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट वो संक्रमण नहीं है, जो हमने पहली और दूसरी लहर के दौरान देखा था.

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