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परमाणु युद्ध होने वाला था भारत और पाकिस्तान के बीच? किसने कहा जानिए

Nilmani Pal
14 Oct 2025 6:59 AM IST
परमाणु युद्ध होने वाला था भारत और पाकिस्तान के बीच? किसने कहा जानिए
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मिस्र/दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को मिस्र में गाजा शांति को लेकर आयोजित सम्मेलन में भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान अब बहुत अच्छे से एक साथ रहेंगे. इस दौरान वह मंच पर पीछे खड़े पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर घूमे और पूछा- "है ना?" इस पर पाकिस्तानी पीएम शरीफ ने सिर हिलाकर हां में जवाब दिया, जिससे कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और मीडिया में हल्की हंसी का माहौल बन गया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

अपने संबोधन में ट्रंप ने कैमरों की तरफ मुस्कुराते हुए कहा, "भारत एक महान देश है जिसके शीर्ष पर मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त है. और उन्होंने शानदार काम किया है. मुझे लगता है कि पाकिस्तान और भारत साथ मिलकर बहुत अच्छे से रहेंगे." ट्रंप, जो मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फताह अल-सीसी के साथ संयुक्त रूप से गाजा शांति शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे, ने पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व की प्रशंसा की और कहा कि क्षेत्रीय शांति अच्छे मित्रों के अच्छे काम करने पर निर्भर करती है. उन्होंने पीछे खड़े शहबाज शरीफ की तरफ इशारा करते हुए चुटकी ली और कहा, "वह इसको संभव बनाने में मदद करेंगे, है ना?"

अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को शिखर सम्मेलन को संबोधित करने के लिए भी आमंत्रित किया. अपने भाषण में शहबाज शरीफ ने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध को रोकने का श्रेय ट्रंप को दिया. उन्होंने कहा, "अगर यह सज्जन अपनी अद्भुत टीम के साथ उन चार दिनों के दौरान हस्तक्षेप न करते तो दोनों परमाणु देशों के बीच युद्ध उस स्तर तक बढ़ सकता था जहां कोई भी यह बताने के लिए जीवित नहीं बचता कि क्या हुआ.

" इससे पहले, ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का क्रेडिट खुद को दिया. उन्होंने इजरायली संसद नेसेट में अपने भाषण के समापन में दावा करते हुए इसे उन आठ विवादों में से एक बताया जिन्हें उन्होंने सुलझाया था. दरअसल, भारत-पाकिस्तान के बीच 10 मई को हुए सीजफायर के बाद से ट्रंप लगातार इसका क्रेडिट ले रहे हैं. हालांकि भारत ने बार-बार स्पष्ट किया कि यह समझौता दोनों सेनाओं के DGMO की बातचीत के बाद हुआ. इसमें किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं रहा.

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