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भारत अमेरिका रिश्तों में नई पहल, G20 से पहले बड़े ऐलान की उम्मीद

Ratna Netam
31 Oct 2026 9:23 PM IST
भारत अमेरिका रिश्तों में नई पहल, G20 से पहले बड़े ऐलान की उम्मीद
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नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक एवं आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी बीच भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले साल एक बार फिर भारत का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि आगामी जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले भारत और अमेरिका के बीच कुछ बेहद महत्वपूर्ण और रोमांचक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।सर्जियो गोर की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका के अटलांटा में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक और जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की जा रही है। इन बैठकों में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर हिस्सा ले रहे हैं। भारत और अमेरिका के अलावा जापान तथा ऑस्ट्रेलिया भी क्वाड समूह के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। इन देशों के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और उभरती तकनीकों को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।
अमेरिका-भारत संबंधों में बढ़ रहा सहयोग
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत और अमेरिका के संबंधों को मजबूत बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में पहले से अधिक स्तर पर सहयोग हो रहा है। उन्होंने विशेष रूप से व्यापार, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी का उल्लेख किया।गोर के अनुसार, दोनों देश केवल कूटनीतिक स्तर पर ही एक-दूसरे के साथ संपर्क नहीं बढ़ा रहे हैं, बल्कि व्यावहारिक परियोजनाओं और ठोस परिणामों पर भी काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की संभावनाएं काफी व्यापक हैं और आने वाले समय में कई नए क्षेत्रों में साझेदारी देखने को मिल सकती है।उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच लगातार उच्चस्तरीय बातचीत हो रही है। इस तरह की बातचीत से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और लंबित मुद्दों का समाधान निकालने में मदद मिल रही है।
अगले साल फिर भारत आ सकते हैं मार्को रुबियो
सर्जियो गोर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे को लेकर भी सकारात्मक उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि रुबियो पिछले छह महीनों में दो बार भारत आ चुके हैं और उम्मीद है कि वह अगले साल भी भारत लौटेंगे। गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच काम करने के लिए मुद्दों और अवसरों की कोई कमी नहीं है।रुबियो का भारत दौरा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्कों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले वह मई 2026 में भारत आए थे, जहां उन्होंने क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था। इसके बाद अक्टूबर में भी उन्होंने भारत का दौरा किया। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों, व्यापारिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।गोर के मुताबिक, अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में ठोस उपलब्धियां हासिल करना चाहता है।
G20 से पहले रोमांचक परिणाम आने की उम्मीद
अमेरिकी राजदूत ने आगामी जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले संभावित उपलब्धियों को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिए। उन्होंने कहा कि दोनों देश पर्दे के पीछे तेजी से काम कर रहे हैं और जी-20 से पहले कुछ रोमांचक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।उन्होंने बताया कि मौजूदा बातचीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वाणिज्यिक कूटनीति और ऊर्जा सहयोग पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को अधिक प्रभावी बनाना और निवेश के नए अवसर तैयार करना है।अमेरिका इस बार जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। दिसंबर 2026 में फ्लोरिडा के डोरल में जी-20 नेताओं का शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत को विशेष महत्व दिया जा रहा है।इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित द्विपक्षीय मुलाकात को लेकर भी चर्चाएं हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की औपचारिक बैठक को लेकर अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि अलग से होनी बाकी है।
क्वाड सहयोग को मजबूत करने पर जोर
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्वाड समूह के माध्यम से रणनीतिक सहयोग लगातार आगे बढ़ रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देना है।अटलांटा में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी इन मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, उभरती तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई।सर्जियो गोर ने क्वाड को भरोसेमंद साझेदारों का समूह बताते हुए कहा कि चारों देश साझा प्राथमिकताओं को वास्तविक परिणामों में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि उच्चस्तरीय बैठकों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर सहयोग बढ़ाना भी जरूरी है।क्वाड के माध्यम से चारों देश क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने की दिशा में भी प्रयास कर रहे हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी निगाहें
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता भी इन संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दोनों देश लंबे समय से इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं। अमेरिकी राजदूत पहले भी कह चुके हैं कि समझौते के अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर प्रगति हुई है, हालांकि कुछ कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर काम बाकी है।इस समझौते के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने, निवेश के अवसरों का विस्तार करने और कारोबारियों के लिए बेहतर परिस्थितियां तैयार करने की उम्मीद है। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद समझौते से जुड़े कुछ प्रावधानों पर दोबारा काम करना पड़ा है।कुल मिलाकर, सर्जियो गोर के बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में सक्रिय है। मार्को रुबियो के अगले साल संभावित भारत दौरे, जी-20 से पहले संभावित घोषणाओं और क्वाड सहयोग को लेकर दिए गए संकेत आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका कूटनीतिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। हालांकि, इन संभावित उपलब्धियों का वास्तविक स्वरूप दोनों देशों की आगामी बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही स्पष्ट होगा।
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