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India दक्षिण कोरिया के समुद्री संबंधों को नई मजबूती

Ratna Netam
27 Oct 2026 9:44 PM IST
India दक्षिण कोरिया के समुद्री संबंधों को नई मजबूती
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बुसान/नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। भारत ने दक्षिण कोरिया के बुसान में समुद्री क्षेत्र से जुड़ी अपनी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया की प्रमुख समुद्री उपकरण निर्माता कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में जहाज निर्माण, समुद्री उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला, आधुनिक बंदरगाहों, हरित नौवहन और जहाजों की रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत ने दक्षिण कोरियाई कंपनियों को देश के तेजी से विकसित होते समुद्री उद्योग में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया है।
बुसान में सर्बानंद सोनोवाल की अहम बैठकें
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल 25 अक्टूबर से चार दिवसीय दक्षिण कोरिया यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने बुसान में आयोजित विश्व समुद्री दिवस से जुड़े उच्चस्तरीय कार्यक्रम में भाग लिया।बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के प्रमुख और दक्षिण कोरिया, नॉर्वे तथा साइप्रस के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।सोनोवाल ने कहा कि समुद्री व्यापार और जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के साथ व्यावहारिक सहयोग भी जरूरी है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी देशों के लिए समान समुद्री मानक होने चाहिए, लेकिन उनके कार्यान्वयन में विकास स्तर, तकनीकी क्षमता और वित्तीय संसाधनों के अंतर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
दक्षिण कोरियाई कंपनियों को भारत में निवेश का निमंत्रण
सोनोवाल ने कोरिया मरीन इक्विपमेंट एसोसिएशन (KOMEA) के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।इस संगठन से 304 समुद्री उपकरण निर्माता, जहाज डिजाइन कंपनियां, शिपयार्ड और मरम्मत से जुड़े उद्यम जुड़े हुए हैं।इनमें एचडी हुंडई, हनवा ओशन और सैमसंग हेवी इंडस्ट्रीज जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।भारत ने कोरियाई कंपनियों को समुद्री उपकरणों और कलपुर्जों का स्थानीय उत्पादन शुरू करने, तकनीक हस्तांतरण तथा भारतीय शिपयार्ड के आधुनिकीकरण में भागीदारी करने का प्रस्ताव दिया है।इस सहयोग से भारत की जहाज निर्माण आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होने की उम्मीद है।
30 अक्टूबर को मुंबई में खुलेगा KOMEA का कार्यालय
भारत-दक्षिण कोरिया समुद्री सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत KOMEA ने मुंबई में अपना पहला भारतीय कार्यालय खोलने की घोषणा की है।यह कार्यालय 30 अक्टूबर 2026 को शुरू किया जाना प्रस्तावित है।इसका उद्देश्य भारतीय जहाज निर्माण कंपनियों और दक्षिण कोरियाई समुद्री उपकरण निर्माताओं के बीच संपर्क बढ़ाना है।इसके माध्यम से जहाज डिजाइन, तकनीकी प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण निर्माण और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर विकसित किए जा सकेंगे।
जहाज रीसाइक्लिंग में भारत की उपलब्धियों पर जोर
बुसान में आयोजित बैठक के दौरान सर्बानंद सोनोवाल ने भारत की जहाज रीसाइक्लिंग क्षमता का भी उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि गुजरात के अलंग-सोसिया जहाज रीसाइक्लिंग क्षेत्र में 115 इकाइयां अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के हांगकांग कन्वेंशन के अनुरूप हैं।इस कन्वेंशन का उद्देश्य पुराने जहाजों को सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल तरीके से नष्ट तथा पुनर्चक्रित करना है।भारत ने समुद्री क्षेत्र में नियामकीय सुधारों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2025 में बनाए गए पांच समुद्री कानून मार्च 2026 से प्रभावी हो चुके हैं।इसके अतिरिक्त भारत की मैरीटाइम सिंगल विंडो प्रणाली 69 बंदरगाहों और टर्मिनलों को कवर कर रही है।
2047 तक शीर्ष पांच जहाज निर्माता देशों में शामिल होने का लक्ष्य
भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में स्थान हासिल करने का लक्ष्य रखा है।इस उद्देश्य से विदेशी तकनीकी साझेदारियों, घरेलू विनिर्माण और आधुनिक शिपयार्ड के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।अप्रैल 2026 में भारत और दक्षिण कोरिया ने 'VOYAGES' नामक व्यापक समुद्री सहयोग ढांचे को अपनाया था।इसके अंतर्गत जहाज निर्माण, समुद्री परिवहन, बंदरगाह विकास और लॉजिस्टिक्स में दीर्घकालिक साझेदारी की योजना बनाई गई है।भारत की सरकारी एजेंसियों ने भविष्य में 400 से अधिक जहाज खरीदने की योजना घोषित की है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये है।
तमिलनाडु में आधुनिक शिपयार्ड विकसित करने की तैयारी
भारत-दक्षिण कोरिया साझेदारी के तहत तमिलनाडु के तूतीकोरिन में अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड शिपयार्ड विकसित करने की योजना भी शामिल है।इसके लिए अप्रैल 2026 में दक्षिण कोरिया की एचडी कोरिया शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंजीनियरिंग तथा भारतीय संस्थाओं के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ था।प्रस्तावित शिपयार्ड की वार्षिक क्षमता 25 लाख ग्रॉस टनेज निर्धारित की गई है।इस परियोजना से भारत में बड़े और विशेष प्रकार के जहाजों का निर्माण बढ़ाने तथा संबंधित उद्योगों में रोजगार के अवसर पैदा करने की उम्मीद है।
समुद्री अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
बुसान में हुई बैठकों ने भारत और दक्षिण कोरिया के बीच समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने के नए अवसर प्रदान किए हैं।आधुनिक जहाज निर्माण, उपकरण उत्पादन, तकनीकी प्रशिक्षण और पर्यावरण अनुकूल जहाज रीसाइक्लिंग में साझेदारी से भारत की समुद्री औद्योगिक क्षमता बढ़ सकती है।केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से भारत के समुद्री विकास कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया।इस पहल को भारत के 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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