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बच्चों की हत्या से पहले मदद मांग रही थी मां डॉक्टरों की भूमिका पर उठे सवाल
अमेरिका : अमेरिका के मैसाचुसेट्स में तीन बच्चों की हत्या के आरोप में चल रहे लिंडसे क्लैंसी के मुकदमे में मानसिक स्वास्थ्य उपचार और डॉक्टरों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्लैंसी पर जनवरी 2023 में अपने तीन बच्चों की हत्या करने का आरोप है। बचाव पक्ष का कहना है कि वह उस समय पोस्टपार्टम साइकोसिस से जूझ रही थीं और उनकी मानसिक स्थिति को ठीक से पहचाना नहीं गया।
मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि क्लैंसी ने हत्या से पहले कई बार चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य सहायता लेने की कोशिश की थी। उनके बचाव पक्ष के अनुसार, उन्होंने अपनी बिगड़ती स्थिति, दवाओं के दुष्प्रभाव और मानसिक परेशानियों के बारे में चिकित्सकों को बताया था।
डॉक्टरों के इलाज पर बचाव पक्ष के सवाल
10 अगस्त की सुनवाई में बचाव पक्ष ने क्लैंसी का इलाज करने वाली मनोचिकित्सक डॉ. जेनिफर टफ्ट्स से लंबी पूछताछ की। बचाव पक्ष ने खास तौर पर वीडियो अपॉइंटमेंट, सीमित समय की थेरेपी और अलग-अलग दवाएं लिखे जाने को लेकर सवाल उठाए।
बचाव पक्ष का तर्क था कि क्लैंसी लगातार अपनी परेशानी और निराशा के बारे में बता रही थीं, फिर भी उनकी स्थिति को पर्याप्त गंभीरता से नहीं समझा गया। डॉक्टर ने हालांकि कहा कि उन्हें उस समय ऐसा नहीं लगा कि वीडियो पर बातचीत के कारण कोई महत्वपूर्ण जानकारी छूट रही है।
क्लैंसी ने मांगी थी मदद?
मुकदमे में सामने आए दस्तावेजों और गवाही के अनुसार, क्लैंसी ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए कई स्तरों पर मदद ली थी। वह अस्पताल गईं, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों से संपर्क किया और दवाएं भी लीं। उनकी ओर से दायर मुकदमे में दावा किया गया था कि उन्होंने अपनी बिगड़ती हालत के बारे में डॉक्टरों को बताया और दवाओं से हालत खराब होने की शिकायत भी की थी।
हत्या से कुछ सप्ताह पहले वह लगभग पांच दिनों तक एक मनोरोग अस्पताल में भी भर्ती रही थीं। अभियोजन पक्ष ने इस दौरान डॉक्टरों के सामने उनके बयानों पर जोर दिया, जबकि बचाव पक्ष ने इसे उनकी लगातार मदद मांगने और मानसिक स्थिति के बिगड़ने के प्रमाण के तौर पर पेश किया।
पोस्टपार्टम साइकोसिस बनी मुकदमे का अहम मुद्दा
बचाव पक्ष का कहना है कि क्लैंसी पोस्टपार्टम साइकोसिस से प्रभावित थीं। यह प्रसव के बाद होने वाली एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें व्यक्ति वास्तविकता से संपर्क खो सकता है। दूसरी ओर, अदालत में पेश की जा रही गवाही और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर अभियोजन पक्ष घटना के समय उनकी मानसिक स्थिति और उनके व्यवहार पर अलग दृष्टिकोण पेश कर रहा है। इसलिए मुकदमे का एक प्रमुख सवाल यही बन गया है कि क्या क्लैंसी उस समय अपनी मानसिक स्थिति के कारण अपने कृत्यों की प्रकृति और परिणाम समझने में सक्षम थीं।
दवाओं को लेकर भी हुई गवाही
फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजिस्ट ने अदालत को बताया कि क्लैंसी के रक्त में चार मनोरोग संबंधी दवाएं मिली थीं—मिर्टाजापीन, लैमोट्रिजीन, ट्रैजोडोन और क्वेटियापीन। विशेषज्ञ ने दवाओं की मौजूदगी और उनकी मात्रा के बारे में गवाही दी, जबकि इन दवाओं का मानसिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ा, यह मुकदमे में महत्वपूर्ण बहस का विषय है।
अदालत में तय होगा असली सवाल
मामले में डॉक्टरों की गवाही, मेडिकल रिकॉर्ड, दवाओं के प्रभाव और क्लैंसी की मानसिक स्थिति से जुड़े सबूतों का विश्लेषण किया जा रहा है। क्या यह मातृत्व से जुड़ा तनाव था, गंभीर मानसिक बीमारी थी या दोनों परिस्थितियों का जटिल मेल—इसका फैसला अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर होगा। फिलहाल मुकदमा जारी है और अंतिम फैसला आने तक क्लैंसी की मानसिक स्थिति या डॉक्टरों की कथित चूक को लेकर किसी निष्कर्ष को अंतिम नहीं माना जा सकता।
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