झारखंड

मनरेगा फंड के इस्तेमाल पर उठे सवाल CAG रिपोर्ट में सामने आई गड़बड़ी

nidhi
12 Aug 2026 8:19 AM IST
मनरेगा फंड के इस्तेमाल पर उठे सवाल CAG रिपोर्ट में सामने आई गड़बड़ी
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मनरेगा योजना में पैसों के दुरुपयोग का खुलासा CAG रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली बात
नई दिल्ली: ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा (MGNREGA) के फंड के इस्तेमाल को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, योजना के तहत उपलब्ध धनराशि का इस्तेमाल कुछ जगहों पर ऐसे खर्चों के लिए किया गया, जो योजना के निर्धारित उद्देश्यों से मेल नहीं खाते।
रिपोर्ट में सामने आया है कि मनरेगा के पैसों से वाहनों के टायर और बैटरी तक खरीदे गए। ऐसे खर्चों ने योजना के तहत सरकारी धन के उपयोग और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वाहन से जुड़े सामान पर खर्च
CAG की ऑडिट रिपोर्ट में विभिन्न मदों में किए गए खर्च की जांच के दौरान वाहन संबंधी सामान की खरीद का मामला सामने आया। इसमें टायर और बैटरी जैसी वस्तुओं पर मनरेगा फंड खर्च किए जाने का उल्लेख है। मनरेगा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराना और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। ऐसे में फंड का इस्तेमाल निर्धारित नियमों से अलग मदों में किए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ऑडिट में सामने आईं अनियमितताएं
CAG की रिपोर्ट सरकारी योजनाओं में धन के इस्तेमाल की जांच करने का महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। ऑडिट के दौरान यदि नियमों के विपरीत खर्च सामने आता है तो संबंधित विभागों से जवाब मांगा जाता है और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। मनरेगा जैसी बड़ी ग्रामीण योजना में फंड के सही इस्तेमाल और पारदर्शिता की विशेष अहमियत है, क्योंकि इसका सीधा संबंध ग्रामीण परिवारों और सार्वजनिक संसाधनों से है।
निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
वाहनों के टायर और बैटरी जैसी चीजों की खरीद के लिए मनरेगा फंड का इस्तेमाल सामने आने के बाद योजना की स्थानीय स्तर पर निगरानी और वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब यह महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग CAG की टिप्पणियों पर क्या जवाब देते हैं और अनियमित खर्च को लेकर सुधारात्मक या जिम्मेदारी तय करने की क्या कार्रवाई की जाती है।
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