विश्व
अमेरिका का बड़ा फैसला: उत्तरी मारियाना द्वीप में चीनी एंट्री पर लगा बैन
Tara Tandi
27 Oct 2026 11:48 AM IST

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वाशिंगटन: ट्रम्प प्रशासन एक ऐसे प्रोग्राम को सस्पेंड कर रहा है, जिसके तहत पहले से जांचे-परखे चीनी नागरिकों को बिना वीज़ा के नॉर्दर्न मारियाना आइलैंड्स जाने की अनुमति थी। इस फैसले के पीछे अमेरिकी सैन्य ठिकानों के पास जासूसी का खतरा, गुआम तक अवैध यात्रा और 'बर्थ टूरिज्म' (बच्चे को जन्म देने के लिए यात्रा) जैसे कारण बताए गए हैं।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के एक नोटिस के अनुसार, 'कॉमनवेल्थ ऑफ द नॉर्दर्न मारियाना आइलैंड्स (CNMI) इकोनॉमिक वाइटैलिटी एंड सिक्योरिटी ट्रैवल ऑथराइजेशन प्रोग्राम' (EVS-TAP) को 30 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे (EDT) से सस्पेंड कर दिया जाएगा। इस नोटिस पर होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी मार्कवेन मुलिन के हस्ताक्षर हैं।
यह नियम नए आवेदकों और "पहले से EVS-TAP ट्रैवल ऑथराइजेशन प्राप्त कर चुके यात्रियों" - दोनों पर लागू होगा। जो चीनी नागरिक इस प्रोग्राम के तहत पहले से ही CNMI में मौजूद हैं, वे अपनी तय अवधि तक वहां रुक सकते हैं, लेकिन "भविष्य की किसी भी यात्रा के लिए उन्हें वीज़ा लेना होगा"।
नोटिस में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में, "3,000 से अधिक चीनी नागरिकों ने CNMI में प्रवेश करने के लिए EVS-TAP का इस्तेमाल किया"। इन यात्रियों की जांच "स्टेट डिपार्टमेंट के कांसुलर अधिकारी" के बजाय "अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन" द्वारा की गई थी।
नोटिस में कहा गया है कि "DHS (होमलैंड सिक्योरिटी विभाग) का मानना है कि चीनी नागरिक लगभग निश्चित रूप से EVS-TAP का गलत फायदा उठा रहे हैं"। इसमें आगे कहा गया है कि बिना वीज़ा के इस तरह बड़ी संख्या में लोगों का आना "सुरक्षा और कानून प्रवर्तन के लिए ऐसे जोखिम पैदा करता है, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता"।
विभाग ने कहा कि इस प्रोग्राम का इस्तेमाल "चीन की जासूसी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है, जिसका निशाना इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के संवेदनशील रक्षा बुनियादी ढांचे हो सकते हैं"। इसमें बताया गया है कि रक्षा विभाग 'टिनियन एयर बेस' को फिर से तैयार कर रहा है, जबकि पास ही स्थित गुआम में कई ऐसे सैन्य ठिकाने हैं जो "अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम" हैं।
हालांकि EVS-TAP के तहत चीनी नागरिकों को CNMI से आगे जाने की मनाही थी, लेकिन नोटिस में कहा गया है कि "वे तस्करी करने वाली नावों के जरिए अवैध रूप से CNMI से गुआम जा सकते हैं"। इसमें मार्च 2024 और फरवरी 2025 के दो मामलों का जिक्र है, जहां चीनी नागरिकों को सजा सुनाई गई थी। इन लोगों ने अन्य चीनी नागरिकों (एक मामले में 9 और दूसरे में 7 लोगों) की CNMI से गुआम तक तस्करी की थी। नोटिस के अनुसार, इनमें से ज्यादातर लोग "बाद में संवेदनशील सैन्य ठिकानों के अंदर या उनके आसपास पाए गए"। 'बर्थ टूरिज्म' (जन्म के लिए विदेश यात्रा) के बारे में नोटिस में कहा गया है: "हालांकि CNMI में 'बर्थ टूरिज्म' लंबे समय से एक मुद्दा रहा है, लेकिन EVS-TAP के तहत बिना वीज़ा के यात्रा की सुविधा और जांच-पड़ताल में ढील मिलने से इस चलन को बढ़ावा मिल सकता है।" इसमें आगे कहा गया है कि 'बर्थ टूरिज्म' का इस्तेमाल "लंबे समय तक खुफिया जानकारी जुटाने या जासूसी गतिविधियों" के लिए भी किया जा सकता है। नोटिस में इस कार्यक्रम से जुड़े जन्मों की संख्या नहीं बताई गई है।
DHS ने CNMI में "चीन (PRC) से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों" के इतिहास की ओर भी इशारा किया। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग और साइपन में चीनी लोगों द्वारा चलाए जा रहे कैसीनो में मजदूरों के शोषण जैसे मामले शामिल हैं।
बाइडन प्रशासन के 2024 के एक नियम के तहत शुरू किया गया यह कार्यक्रम 20 फरवरी, 2025 से लागू हुआ था। इसके तहत चीनी नागरिकों को 14 दिनों तक रुकने की अनुमति थी, और यह परमिट एक साल तक मान्य था। "राजनीतिक और सुरक्षा चिंताओं" के कारण, 2009 से ही चीन को गुआम-CNMI वीज़ा छूट कार्यक्रम से बाहर रखा गया था।
DHS ने माना कि चीनी पर्यटकों पर निर्भर CNMI के व्यवसायों और वहां जाने के इच्छुक लोगों को नुकसान हो सकता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इससे जुड़े "गंभीर जोखिम" कहीं अधिक बड़े हैं। जो लोग वास्तव में पर्यटक के तौर पर जाना चाहते हैं, वे अभी भी सामान्य अमेरिकी वीज़ा के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस रोक के बाद चीनी नागरिकों के लिए पुरानी 'पैरोल नीति' फिर से बहाल नहीं होगी।
फॉक्स न्यूज़ के अनुसार, रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली ने इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने 'X' पर लिखा, "अमेरिका, CCP (चीनी कम्युनिस्ट पार्टी) के लिए नागरिकता हथियाने की कोई नर्सरी नहीं है।" रिपोर्ट के मुताबिक, सीनेटर माइक ली, रिक स्कॉट, जॉन कॉर्निन और बिल कैसिडी ने अप्रैल में ही मुल्लिन से इस कार्यक्रम को खत्म करने की मांग की थी।
यह कदम प्रशासन की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद वीज़ा जांच को सख्त बनाना और 'बर्थ टूरिज्म' पर लगाम लगाना है।
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