विश्व

नेपाल की विदेश नीति पर बड़ा बयान दोनों देशों से रिश्ते रखना जरूरी

Ratna Netam
27 Aug 2026 6:51 PM IST
नेपाल की विदेश नीति पर बड़ा बयान दोनों देशों से रिश्ते रखना जरूरी
x
नेपाल : और भारत-चीन संबंधों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने उन दावों को खारिज किया है जिनमें कहा जा रहा था कि नेपाल पूरी तरह चीन के प्रभाव में जा रहा है। विदेश मंत्री ने साफ कहा कि नेपाल भारत और चीन दोनों के साथ अपने रिश्तों को महत्व देता है और किसी एक देश को दूसरे की जगह नहीं दे सकता।
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने एक कार्यक्रम में भारत और चीन के साथ नेपाल के रिश्तों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के साथ नेपाल के संबंध अलग-अलग महत्व रखते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह कोई व्यक्ति अपने पिता को मां से या मां को पिता से बदलने की बात नहीं कर सकता, उसी तरह नेपाल भी भारत और चीन में से किसी एक को चुनकर दूसरे को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
भारत और चीन दोनों महत्वपूर्ण पड़ोसी
नेपाल भौगोलिक रूप से भारत और चीन के बीच स्थित है। भारत के साथ नेपाल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध काफी पुराने हैं। वहीं चीन के साथ भी नेपाल के व्यापार और विकास से जुड़े संबंध रहे हैं।
शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल की विदेश नीति किसी बाहरी दबाव के आधार पर नहीं बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर तय की जाती है। उन्होंने कहा कि नेपाल दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है।
भारत के साथ व्यापार सबसे ज्यादा
नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत के साथ आर्थिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नेपाल का लगभग दो-तिहाई व्यापार भारत के साथ होता है और भारत उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
उन्होंने कहा कि नेपाल चाहता है कि भारत की कंपनियां भी वहां निवेश बढ़ाएं। ऊर्जा, पर्यटन, तकनीक और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए नेपाल में बड़े अवसर मौजूद हैं।
चीन के BRI प्रोजेक्ट पर भी बोले
विदेश मंत्री ने चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नेपाल ने 2017 में BRI से जुड़ा समझौता किया था, लेकिन पिछले वर्षों में नेपाल को इससे कोई बड़ी आर्थिक सहायता नहीं मिली है।
उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल किसी भी देश के साथ संबंध खत्म करने की नीति नहीं अपनाता। उनका कहना था कि हर देश के साथ रिश्तों की अपनी अलग अहमियत होती है।
भारत में उठ रहे सवालों पर जवाब
पिछले कुछ समय से भारत में यह चर्चा होती रही है कि नेपाल चीन के करीब जा रहा है। विदेश मंत्री ने ऐसी धारणाओं को खारिज करते हुए कहा कि नेपाल की चीन के साथ दोस्ती का मतलब यह नहीं है कि वह भारत से दूर हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नेपाल के लिए भारत के साथ संबंध बेहद खास हैं और दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्ते हैं।
बिजली और निवेश में बढ़ सकता है सहयोग
नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के बीच बिजली व्यापार को लेकर संभावनाएं काफी ज्यादा हैं। नेपाल से भारत को बिजली निर्यात बढ़ाने की दिशा में भी काम हो रहा है।
नेपाल में जलविद्युत की बड़ी संभावनाएं हैं और भारत इस क्षेत्र में निवेश का महत्वपूर्ण भागीदार बन सकता है।
संतुलित विदेश नीति पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल लंबे समय से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है। दोनों देशों के साथ संबंध बनाए रखना नेपाल की आर्थिक और रणनीतिक जरूरत भी है।
भारत के साथ खुली सीमा, सांस्कृतिक समानता और व्यापारिक निर्भरता नेपाल के लिए महत्वपूर्ण है, वहीं चीन के साथ बुनियादी ढांचे और व्यापारिक संबंध भी अहम हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री के बयान से साफ है कि काठमांडू किसी एक खेमे में जाने के बजाय दोनों पड़ोसी देशों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखना चाहता है। आने वाले समय में भारत और नेपाल के बीच व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग और बढ़ने की संभावना है।
Next Story