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भूकंप से नहीं ग्लेशियर टूटने से मची तबाही नेपाल बाढ़ की वजह पर खुलासा

Ratna Netam
27 Aug 2026 6:44 PM IST
भूकंप से नहीं ग्लेशियर टूटने से मची तबाही नेपाल बाढ़ की वजह पर खुलासा
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नेपाल : आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। अचानक आए इस जलसैलाब ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस भीषण आपदा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी तेजी से इतनी बड़ी बाढ़ कैसे आई। इसको लेकर वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच अलग-अलग आकलन सामने आए हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की शुरुआती सैटेलाइट जांच में इस आपदा के पीछे भूकंपीय गतिविधि और उसके बाद ग्लेशियर टूटने की संभावना जताई गई है। वहीं अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने कहा है कि इसे सीधे भूकंप से जोड़ना सही नहीं होगा। अमेरिकी एजेंसी के मुताबिक, यह घटना मुख्य रूप से ग्लेशियर ढहने, भूस्खलन और मलबे के अचानक बहाव के कारण हुई।
ISRO की जांच में क्या सामने आया
ISRO की राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने आपदा से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बर्फ, चट्टानों और मलबे के खिसकने की घटना हुई।
भारतीय वैज्ञानिकों के शुरुआती आकलन के अनुसार, क्षेत्र में आए 4.9 तीव्रता के भूकंप के बाद ग्लेशियर अस्थिर हो सकता है। इसके बाद बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा नीचे गिरा, जिससे नदी का रास्ता कुछ समय के लिए बाधित हुआ। बाद में जब यह प्राकृतिक अवरोध टूटा तो पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया और भयंकर बाढ़ में बदल गया।
कैसे बनी विनाशकारी बाढ़
विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं अचानक होती हैं। जब ग्लेशियर, बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा नदी में गिरता है तो नदी का सामान्य प्रवाह रुक सकता है। पानी जमा होने के बाद जब यह बाधा टूटती है तो बहुत तेज गति से पानी, मिट्टी और पत्थरों का सैलाब नीचे की ओर बढ़ता है।
नेपाल की भोटे कोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही घटनाक्रम सामने आने की बात कही जा रही है। अचानक आए मलबे और पानी के तेज बहाव ने आसपास के इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया।
अमेरिका ने भूकंप वाली थ्योरी को क्यों नकारा
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने अपने आकलन में कहा कि जिस कंपन को कुछ जगहों पर भूकंप से जोड़ा गया, वह वास्तव में ग्लेशियर गिरने और बड़े पैमाने पर मलबे के बहाव से पैदा हुआ कंपन हो सकता है।
USGS के अनुसार, इस घटना में बर्फ, चट्टान और मलबा इतनी तेजी से नीचे आया कि उससे भूकंप जैसे झटके महसूस हुए। एजेंसी ने इसे प्राकृतिक भू-स्खलन और ग्लेशियर टूटने की घटना बताया।
हिमालयी क्षेत्र क्यों है इतना संवेदनशील
नेपाल हिमालयी क्षेत्र में आता है, जहां भूकंप, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से प्रभावित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय में तापमान बढ़ने से बर्फ की स्थिरता कमजोर हो सकती है। इससे ग्लेशियर झीलों के टूटने और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
आपदा ने बढ़ाई चिंता
नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी देशों के सामने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसी घटनाओं में समय पर चेतावनी प्रणाली, सैटेलाइट निगरानी और बेहतर आपदा प्रबंधन बेहद जरूरी हो जाता है।
भारत समेत कई पड़ोसी देश नेपाल की मदद में आगे आए हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सहायता पहुंचाई जा रही है।
वैज्ञानिकों की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल नेपाल बाढ़ की सटीक वजह को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन जारी है। ISRO और अन्य एजेंसियों के शुरुआती निष्कर्ष अलग-अलग पहलुओं पर रोशनी डाल रहे हैं। हालांकि सभी विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि ग्लेशियर टूटना, भूस्खलन और पहाड़ी क्षेत्रों की संवेदनशीलता इस आपदा के बड़े कारणों में शामिल हैं।
नेपाल की यह घटना भविष्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक बदलावों पर लगातार नजर रखने और मजबूत तैयारी करने की जरूरत है।
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