विश्व
आतंकवाद और साइबर अपराध के खिलाफ BIMSTEC देशों का बड़ा फैसला
Ratna Netam
13 Oct 2026 9:11 PM IST

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नई दिल्ली। आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी और साइबर अपराध जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए BIMSTEC के सात सदस्य देशों ने आपसी सहयोग मजबूत करने का फैसला किया है। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित BIMSTEC गृह मंत्रियों की पहली बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर व्यापक संयुक्त घोषणापत्र अपनाया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में मानव तस्करी, आतंकवाद के वित्तपोषण, अवैध वित्तीय लेन-देन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पांच महत्वपूर्ण समझौतों एवं कार्य योजनाओं को मंजूरी दी गई।गृह मंत्रालय के अनुसार, बैठक में सदस्य देशों ने क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और विकास के लिए सामूहिक प्रयास बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान सीमा पार आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध और संगठित अपराध से निपटने को प्राथमिकता दी गई।
दिल्ली घोषणापत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर
बैठक में BIMSTEC सदस्य देशों ने दिल्ली घोषणापत्र अपनाया। इसमें सीमा पार अपराधों की रोकथाम और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग मजबूत बनाने पर सहमति बनी।घोषणापत्र में खुफिया जानकारी साझा करने, पारस्परिक कानूनी सहायता, अपराधियों के प्रत्यर्पण और क्षमता निर्माण को प्राथमिकता दी गई।इसके अलावा पहले से मौजूद समझौतों और कार्य योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया। सदस्य देशों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए मानव तस्करी का शिकार बनाई जाने वाली महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया।
मानव तस्करी रोकने के लिए नया समझौता
बैठक में मानव तस्करी के खिलाफ BIMSTEC कन्वेंशन को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच मानव तस्करी रोकने, अपराधियों पर कार्रवाई करने और पीड़ितों के संरक्षण तथा पुनर्वास के लिए सहयोग बढ़ाना है।इस समझौते में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। सदस्य देशों ने मानव तस्करी से जुड़े मामलों में समन्वय बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
नशीले पदार्थों और आतंकवाद की फंडिंग पर कार्रवाई
गृह मंत्रियों ने मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए BIMSTEC कार्य योजना को भी मंजूरी दी। इसमें नशीली दवाओं, प्रतिबंधित मनोविकारक पदार्थों और इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की अवैध तस्करी रोकने पर जोर दिया गया।इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए क्षमता निर्माण संबंधी समझौता ज्ञापन को मंजूरी मिली।इस व्यवस्था के तहत विशेषज्ञों के प्रशिक्षण, वित्तीय खुफिया जानकारी, जांच और अपराध से अर्जित संपत्तियों की वसूली जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।
अवैध वित्तीय लेन-देन पर लगेगी लगाम
बैठक में चौथे महत्वपूर्ण फैसले के तहत अवैध वित्तीय प्रवाह की पहचान और रोकथाम के लिए कार्य योजना को मंजूरी दी गई।इस योजना का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अवैध धन के स्रोतों, संभावित जोखिमों और धन हस्तांतरण के माध्यमों की पहचान करना है।सदस्य देशों ने वित्तीय अपराधों के खिलाफ जानकारी साझा करने और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने को आवश्यक बताया।
प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए साझा रणनीति
पांचवें फैसले के तहत बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी और समन्वय बढ़ाने के लिए कार्य योजना को मंजूरी दी गई।इसके अंतर्गत संयुक्त अभ्यास, पूर्व चेतावनी प्रणाली, आपदा जोखिम मानचित्रण, प्रशिक्षण केंद्रों, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार पर सहयोग किया जाएगा।सुनामी के जोखिम को कम करना और आपदा के दौरान सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान करना भी इस योजना का हिस्सा है।
अमित शाह बोले- आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है।उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि क्षेत्र में आतंकवादी संगठनों को शरण लेने, भर्ती करने, प्रशिक्षण देने या वित्तीय संसाधन जुटाने का अवसर नहीं मिलना चाहिए।अमित शाह ने नशीले पदार्थों की तस्करी को युवाओं और समाज के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए पूरे क्षेत्र को एक साथ काम करने की आवश्यकता जताई।
सात देशों की सुरक्षा साझेदारी होगी मजबूत
BIMSTEC में भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। यह संगठन बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देता है।नई दिल्ली में आयोजित पहली गृह मंत्री स्तरीय बैठक में हुए फैसलों को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।सदस्य देशों ने सहमति जताई कि आतंकवाद, संगठित अपराध और साइबर खतरों से निपटने के लिए केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि साझा क्षेत्रीय रणनीति के साथ काम करना जरूरी है।
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