विश्व

Mahendra मखीजानी गिरफ्तार, 100 मिलियन डॉलर फ्रॉड मामला चर्चा में

Kavita2
11 Jun 2026 9:59 AM IST
Mahendra मखीजानी गिरफ्तार, 100 मिलियन डॉलर फ्रॉड मामला चर्चा में
x

America अमेरिका : फ़ेडरल अधिकारियों ने भारतीय मूल के 44 वर्षीय व्यवसायी महेंद्र मखीजानी को लगभग 100 मिलियन डॉलर के बैंक धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया है। मखीजानी को बुधवार सुबह कैलिफ़ोर्निया के पॉश इलाके न्यूपोर्ट बीच स्थित उनके आलीशान घर से हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

महेंद्र मखीजानी न्यूपोर्ट बीच स्थित ‘कैंटर ग्रुप V LLC’ के कंट्रोलर थे। अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया के अनुसार, इस कंपनी का एक लेंडिंग एग्रीमेंट था, जिसके तहत उसे पीड़ित बैंक के पास केवल ‘फ़र्स्ट-लीन’ यानी प्राथमिक अधिकार वाले रियल एस्टेट लोन रखने की अनुमति थी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बैंक के लोन पर कैंटर ग्रुप का पहला अधिकार हो और किसी अन्य लेनदार का दावा उससे ऊपर न हो।

जांच के दौरान पता चला कि सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच, मखीजानी ने टाइटल इंश्योरेंस पॉलिसी में हेरफेर किया। उन्होंने झूठा दावा किया कि कुछ रियल एस्टेट लोन पर कैंटर ग्रुप का पहला अधिकार है, जबकि वास्तविकता में दूसरे लेनदारों का अधिकार प्राथमिक था। इस धोखाधड़ी के कारण बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

फेडरल अधिकारियों ने बताया कि यह मामला वित्तीय धोखाधड़ी और बैंकिंग नियमों के उल्लंघन का गंभीर उदाहरण है। अधिकारियों का कहना है कि मखीजानी ने बैंक को गुमराह कर फर्जी दस्तावेज़ पेश किए और अरबों डॉलर के लेन-देन में अनियमितता की। इससे निवेशकों और बैंकिंग संस्थानों की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं।



गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने बयान जारी किया कि मामले की जांच अभी जारी है और संभावित अन्य सहयोगियों या कंपनी के अधिकारियों की भूमिका भी देखी जा रही है। इसके अलावा, बैंक और निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला वैश्विक वित्तीय धोखाधड़ी और रियल एस्टेट लेन-देन में पारदर्शिता के महत्व को उजागर करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि बैंकिंग संस्थानों को ऐसे मामलों से बचने के लिए कठोर निगरानी और नियमित ऑडिट की आवश्यकता है।

मखीजानी के खिलाफ फेडरल कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। आरोपों में बैंक धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, और वित्तीय दस्तावेज़ों में हेरफेर शामिल है। इस मामले में लंबी कानूनी लड़ाई की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिकी मीडिया और वित्तीय विशेषज्ञ इस मामले पर लगातार अपडेट दे रहे हैं। गिरफ्तारी के वीडियो और जांच की जानकारी ने सोशल मीडिया और समाचार चैनलों में व्यापक चर्चा शुरू कर दी है।

इस घटना ने भारतीय मूल के व्यापारियों और अमेरिकी वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता के महत्व पर भी ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से सीख लेकर बैंकिंग क्षेत्र में कड़े नियम और निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता और बढ़ गई है।

Next Story