
मुंबई | तुर्की में राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इस्तांबुल के मेयर इक्रेम इमामोगलू के बीच टकराव चरम पर पहुंच चुका है। इमामोगलू की गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे हैं।
क्यों हुई गिरफ्तारी?
इमामोगलू पर भ्रष्टाचार और टेरर फंडिंग के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन उन्होंने इसे एर्दोगन सरकार की साजिश करार दिया है। उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब 2028 में तुर्की में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं, और माना जा रहा था कि इमामोगलू एर्दोगन को कड़ी चुनौती दे सकते हैं।
जनता की नाराजगी और सड़क पर विरोध
इमामोगलू के समर्थन में इस्तांबुल समेत कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एर्दोगन लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं और अपने प्रतिद्वंद्वियों को राजनीति से बाहर करने की कोशिश कर रहे हैं।
एर्दोगन को क्यों डर?
इक्रेम इमामोगलू 2019 में इस्तांबुल के मेयर बने थे, और तब से वह एर्दोगन के लिए सबसे बड़े विपक्षी चेहरे के रूप में उभर रहे हैं। इस्तांबुल की सत्ता तुर्की की राजनीति का केंद्र मानी जाती है, और यहां हारने का मतलब पूरे देश में अपनी पकड़ खोना हो सकता है। यही वजह है कि एर्दोगन उनके बढ़ते कद से परेशान हैं।
2028 के चुनाव और सियासी घमासान
अगर इमामोगलू को जेल में रखा जाता है तो एर्दोगन के लिए सत्ता का रास्ता आसान हो सकता है। लेकिन जनता का बढ़ता गुस्सा तुर्की की राजनीति में एक नया भूचाल ला सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह गिरफ्तारी एर्दोगन के लिए फायदे का सौदा साबित होती है या उनके खिलाफ भारी पड़ती है।





