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मुंबई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मजबूत होते संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और क्षेत्रीय अनिश्चितताओं के बावजूद भारत-यूएई के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंचने को आर्थिक सहयोग की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।मुंबई में यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत और यूएई की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैल चुकी है। दोनों विदेश मंत्रियों ने 19 अक्टूबर को मुंबई में मुलाकात की थी।
भारत-यूएई संबंधों में लगातार हो रही प्रगति
बैठक के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि एक दशक से अधिक समय से दोनों देशों के बीच निरंतर उच्चस्तरीय संपर्क बना हुआ है। इसका सकारात्मक प्रभाव द्विपक्षीय संबंधों पर दिखाई दे रहा है।उन्होंने कहा, "एक दशक से अधिक के निरंतर जुड़ाव के बाद, भारत-यूएई संबंध आज वास्तव में एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में अपने वादे पर खरे उतर रहे हैं। इस साल नेतृत्व स्तर पर जुड़ाव में असाधारण तेजी देखने को मिली है।"जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व ने आपसी सहयोग को नई दिशा दी है। नियमित संवाद और उच्चस्तरीय यात्राओं ने दोनों देशों के बीच विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
100 अरब डॉलर के पार पहुंचा द्विपक्षीय व्यापार
भारत और यूएई के बीच आर्थिक सहयोग में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेजी आई है। विशेष रूप से व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के लागू होने के बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई गति मिली है।भारत और यूएई के बीच फरवरी 2022 में CEPA पर हस्ताक्षर हुए थे। यह समझौता 1 मई 2022 से प्रभावी हुआ। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करना, निवेश बढ़ाना और विभिन्न उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाना है।भारतीय सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 100.06 अरब डॉलर से अधिक रहा। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 101.25 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग
बैठक के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों ने ऊर्जा सुरक्षा और निवेश के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया। यूएई भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों में शामिल है और दोनों देशों के बीच तेल, प्राकृतिक गैस तथा अन्य ऊर्जा संसाधनों को लेकर महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंध हैं।इसके अलावा बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास से जुड़े क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।यूएई के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने आर्थिक, व्यापारिक, वित्तीय, सांस्कृतिक और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों की समीक्षा की।
वैश्विक चुनौतियों के बीच साझेदारी को मजबूती
जयशंकर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी चुनौतियों और क्षेत्रीय अनिश्चितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद भारत और यूएई ने आपसी संबंधों को मजबूत बनाए रखा है।दोनों देशों के बीच बातचीत में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। इस दौरान शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई।यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने भी भारत के साथ ऐतिहासिक संबंधों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और साझा हितों पर आधारित साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
2032 तक 200 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और यूएई ने आर्थिक संबंधों को और विस्तारित करने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। दोनों देश वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना चाहते हैं।इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापार, निवेश, औद्योगिक उत्पादन और छोटे तथा मध्यम उद्यमों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनवरी 2026 में दोनों देशों के नेतृत्व ने व्यापार विस्तार के इस लक्ष्य पर सहमति जताई थी।मुंबई में हुई उच्चस्तरीय बातचीत को भारत-यूएई संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों ने आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
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