विश्व

ब्रिटिश संसद में उठा पाकिस्तान के हिंदुओं का मुद्दा विदेश मंत्रालय से बयान की मांग

nidhi
1 Nov 2026 7:11 AM IST
ब्रिटिश संसद में उठा पाकिस्तान के हिंदुओं का मुद्दा विदेश मंत्रालय से बयान की मांग
x
ब्रिटिश संसद में सवाल सरकार से मांगा जवाब
लंदन: पाकिस्तान में हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा ब्रिटिश संसद में उठाया गया है। कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने हिंदुओं के कथित उत्पीड़न से जुड़ी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए गंभीर चिंता जताई। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि ऐसे समुदायों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। ब्लैकमैन ने विदेश सचिव या विदेश मंत्रालय के किसी मंत्री से सदन में आकर सरकार का पक्ष रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा ब्रिटेन की विदेश नीति की चिंता का भी हिस्सा होनी चाहिए।
ब्रिटिश संसद के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, ब्लैकमैन ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को हाउस ऑफ कॉमन्स में यह मामला उठाया। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश हिंदुओं से संबंधित सर्वदलीय संसदीय समूह को एडवोकेसी संगठन इनसाइट यूके की एक रिपोर्ट प्राप्त हुई है। उनके अनुसार, रिपोर्ट में पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की स्थिति का चिंताजनक विवरण दिया गया है। ब्लैकमैन ने वहां हिंदुओं के सामने गंभीर मुश्किलें होने की बात कही और सरकार से इस विषय पर स्पष्ट जानकारी मांगी। उनका प्रश्न मुख्य रूप से ब्रिटेन की ओर से किए जा रहे प्रयासों और उपलब्ध सुरक्षा उपायों पर केंद्रित था।
ब्लैकमैन ने सदन के नेता से आग्रह किया कि वह विदेश मंत्रालय के स्तर पर इस मुद्दे को उठाएं। उनकी मांग थी कि सरकार बताए कि उन देशों में धार्मिक अल्पसंख्यकों की मदद के लिए क्या किया जा रहा है, जहां वे उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। सांसद ने इसे केवल किसी एक देश के भीतर की सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित विषय के रूप में नहीं रखा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक समुदायों के संरक्षण की जरूरत सामने रखी। हालांकि, इस संसदीय सवाल के दौरान किसी नई सहायता योजना, प्रतिबंध या विशेष सुरक्षा व्यवस्था की घोषणा नहीं हुई।
उनके सवाल पर सदन के नेता सर एलन कैंपबेल ने कहा कि वह संबंधित चिंताएं विदेश, राष्ट्रमंडल एवं विकास कार्यालय तक पहुंचाएंगे। उन्होंने धार्मिक समुदायों के साथ व्यवहार को सरकार के लिए गंभीर विषय बताया। कैंपबेल ने विदेश मंत्रालय के सहयोगियों से चर्चा करने और ब्लैकमैन की मांग के अनुरूप बयान की संभावना देखने का आश्वासन दिया। इस प्रतिक्रिया से मुद्दे को संबंधित विभाग तक ले जाने की बात स्पष्ट होती है। हालांकि, मंत्री के बयान की तारीख या आगे की किसी ठोस कार्रवाई का कार्यक्रम उस जवाब में निर्धारित नहीं किया गया।
इनसाइट यूके की रिपोर्ट में पाकिस्तान में हिंदुओं की धार्मिक स्वतंत्रता, सुरक्षा और आजीविका से जुड़े आरोप उठाए गए हैं। प्रकाशित विवरण के अनुसार, रिपोर्ट में पूजा स्थलों पर हमलों तथा जबरन विवाह और धर्मांतरण जैसे मामलों का उल्लेख है। संगठन ने इन विषयों पर अधिक अंतरराष्ट्रीय ध्यान देने की मांग की है। यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि रिपोर्ट एक एडवोकेसी संगठन ने तैयार की है। उसमें दर्ज आरोपों को उसी संगठन के निष्कर्ष और दावों के रूप में देखा जाना चाहिए। संसदीय मंच पर रिपोर्ट का उल्लेख होना अपने आप में हर घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद सर्वदलीय संसदीय समूह के स्तर पर भी आगे कदम उठाने के विकल्पों पर चर्चा हुई। समूह के सचिवालय के प्रवक्ता के हवाले से प्रकाशित जानकारी के अनुसार, विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर बैठक मांगने का सुझाव दिया गया था। उद्देश्य था कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित अत्याचारों से जुड़ी चिंताएं पाकिस्तान के अधिकारियों के सामने रखी जाएं। पाकिस्तान को मिलने वाली सहायता में कटौती का अनुरोध करने पर भी चर्चा हुई। हालांकि, चर्चा और सरकारी निर्णय अलग बातें हैं। उपलब्ध जानकारी में ब्रिटिश सरकार की ओर से ऐसी कटौती घोषित किए जाने की पुष्टि नहीं है।
ब्रिटिश सहायता को मानवाधिकारों की स्थिति में प्रगति से जोड़ने और कुछ धनराशि अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा करने वाले संगठनों के लिए निर्धारित करने की सिफारिश भी की गई है। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर प्रत्येक छह महीने में आधिकारिक रिपोर्ट तैयार कराने का सुझाव है। उत्पीड़न झेलने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए शरण संबंधी रास्ते उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई है। ये रिपोर्ट की सिफारिशें हैं, जिन्हें ब्रिटेन की स्वीकृत नई नीति के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
इसी व्यापक विषय पर ब्रिटिश सरकार का एक अलग लिखित जवाब भी सामने आया है। लॉर्ड एल्टन के प्रश्न के उत्तर में 28 अक्टूबर को सरकार ने पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों से जुड़ी हिंसा और धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। जवाब में कहा गया कि ब्रिटेन धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है तथा पाकिस्तान सरकार के सामने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग का मुद्दा नियमित रूप से उठाता है। यह जवाब अलग संसदीय प्रश्न से संबंधित है और इसे ब्लैकमैन की मांग पर दिया गया नया विस्तृत बयान नहीं माना जाना चाहिए। लिखित जवाब के अनुसार, मंत्री डौटी ने छह अक्टूबर की पाकिस्तान यात्रा के दौरान वहां के कानून, न्याय एवं मानवाधिकार मंत्री तारड़ के साथ धार्मिक अल्पसंख्यकों, जिनमें ईसाई भी शामिल हैं, की स्थिति पर चर्चा की थी। ब्रिटिश सरकार ने सुरक्षा मजबूत करने, उचित कानूनी प्रक्रिया और जवाबदेही को प्रोत्साहित करने की बात कही। ब्लैकमैन के हालिया हस्तक्षेप के बाद अब ध्यान इस पर रहेगा कि विदेश मंत्रालय हिंदुओं से संबंधित रिपोर्ट पर क्या आकलन प्रस्तुत करता है और संसद को आगे क्या जानकारी देता है।
Next Story