
वर्ल्ड | इज़राइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। देश में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस अहरोन बाराक ने गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार की विवादास्पद न्यायिक सुधार नीतियों और गाजा युद्ध को लेकर चल रही अंदरूनी असहमति ने इज़राइल को "गंभीर संकट" में डाल दिया है।
नेतन्याहू के खिलाफ गुस्सा क्यों बढ़ रहा है?
नेतन्याहू सरकार लंबे समय से न्यायपालिका में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है, जिसे विपक्ष और कई कानूनी विशेषज्ञ "लोकतंत्र के लिए खतरा" बता रहे हैं। सरकार की न्यायिक सुधार योजना के तहत सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को सीमित किया जा रहा है, जिससे सरकार को ज्यादा नियंत्रण मिलेगा। इस फैसले का भारी विरोध हो रहा है और लाखों लोग सड़कों पर उतर चुके हैं।
इसके अलावा, गाजा युद्ध को लेकर भी नेतन्याहू सरकार की आलोचना हो रही है। देश के अंदर कई लोग इस युद्ध को खत्म करने की मांग कर रहे हैं, जबकि कई नेता इसे जारी रखने के पक्ष में हैं। इससे इज़राइल में सामाजिक और राजनीतिक विभाजन और गहरा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस की चेतावनी
पूर्व सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस अहरोन बाराक ने कहा है कि नेतन्याहू सरकार जिस दिशा में जा रही है, वह देश को गृहयुद्ध की ओर धकेल सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता किया गया तो इज़राइल की स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी।
बाराक के बयान ने देश में हलचल मचा दी है, क्योंकि वह इज़राइल के सबसे सम्मानित न्यायविदों में से एक हैं। उनके इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि इज़राइल में मौजूदा संकट सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और सामाजिक भी है।
सेना और जनता में बढ़ रही दरार
इज़राइल की सेना में भी सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। कई सैनिक और अफसर सरकार के फैसलों का विरोध कर रहे हैं। कई पूर्व जनरलों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो सेना के भीतर भी विद्रोह जैसी स्थिति बन सकती है।
जनता भी इस असंतोष को खुलकर जाहिर कर रही है। सरकार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और लाखों लोग नेतन्याहू के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
क्या इज़राइल गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर नेतन्याहू सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो देश में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क सकती है। सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण पहले से ही बढ़ चुका है, और अब सेना और न्यायपालिका भी दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है।
आने वाले हफ्ते इज़राइल के लिए बेहद अहम होंगे। अगर सरकार ने न्यायिक सुधारों पर पुनर्विचार नहीं किया और गाजा युद्ध को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।





