'अमानवीय नीति'— बलूच छात्रों के गायब होने पर Pakistan की चौतरफा निंदा

Balochistan , बलूचिस्तान : बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता सामी दीन बलूच ने बलूचिस्तान में छात्रों के कथित तौर पर जबरन गायब किए जाने की घटनाओं में हालिया बढ़ोतरी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में यह सिलसिला और तेज़ हो गया है।X पर पोस्ट किए गए एक बयान में बलूच ने कहा, "बलूचिस्तान में लोगों को जबरन गायब करने का सिलसिला कभी पूरी तरह से नहीं रुका, लेकिन खास तौर पर पिछले कुछ दिनों में छात्रों के जबरन गायब होने की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी हुई है।" उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण राजनीतिक संगठनों से जुड़े छात्रों और युवाओं को उनके घरों, हॉस्टलों और शिक्षण संस्थानों से उठाया जा रहा है।इस तरीके को "विफल और अमानवीय सरकारी नीति" बताते हुए उन्होंने कहा कि विद्रोह-विरोधी कार्रवाई के नाम पर लोगों को जबरन गायब करने से प्रांत में स्थिरता नहीं आई है।
उन्होंने कहा, "अगर यह तरीका वास्तव में शांति लाने का ज़रिया होता, तो बलूचिस्तान आज खून-खराबे, अशांति और नफ़रत के दलदल में नहीं डूबा होता।" उन्होंने आगे कहा कि ऐसी नीतियां केवल नाराज़गी और हिंसा को बढ़ाती हैं।बलूच ने यह भी दावा किया कि लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सालों तक हिरासत में रखा जाता है और उन्हें यातना व अपमान का सामना करना पड़ता है।उनके अनुसार, ऐसी कार्रवाइयों से प्रभावित युवाओं में गुस्सा और बदले की भावना पैदा होती है, और उनमें से कुछ बाद में हिंसा का रास्ता अपना लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी समस्या की असली वजहों की जांच करने के बजाय, जबरन गायब करने की घटनाओं के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले कार्यकर्ताओं पर ही उग्रवाद को बढ़ावा देने का आरोप मढ़ देते हैं।
उन्होंने सरकार पर शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों पर ज़िम्मेदारी डालने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।बलूच ने कहा कि अस्थिरता की असली वजहें "गैर-कानूनी हरकतें, सरकारी दमन और ज़ालिम नीतियां" हैं, जो संघर्ष को सुलझाने के बजाय दुश्मनी को और बढ़ाती हैं।
अपने बयान के आखिर में, बलूच ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे आलोचकों को निशाना बनाने के बजाय अपने तौर-तरीकों पर फिर से विचार करें।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात पर सोचना चाहिए कि दशकों से चले आ रहे कथित दमन, लोगों को जबरन गायब करने, गैर-न्यायिक हत्याओं और सामूहिक सज़ाओं के बावजूद बलूचिस्तान में स्थायी शांति क्यों नहीं आ पाई है।
पाकिस्तानी सरकार ने पहले भी सुनियोजित तरीके से लोगों को जबरन गायब करने के आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि उसके सुरक्षा अभियान कानून के दायरे में चलाए जाते हैं और उनका मकसद उग्रवाद से निपटना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।





