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हिंद महासागर में भारत की नई कूटनीति, 'String of Pearls' को टक्कर

Saba Naaz
28 Jun 2026 3:19 PM IST
हिंद महासागर में भारत की नई कूटनीति, String of Pearls को टक्कर
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World: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा भारत की हिंद महासागर रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह दौरा न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी को संतुलित करने की भारत की रणनीति का भी अहम हिस्सा है।

प्रधानमंत्री मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर हैं। वे यहां देश के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं और नेशनल असेंबली को भी संबोधित करेंगे। यह करीब 11 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की सेशेल्स यात्रा है। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के आमंत्रण पर हो रही इस यात्रा में समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, क्षमता निर्माण और विकास सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख एजेंडा में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं, जिससे यह दौरा और अधिक महत्वपूर्ण बन गया है।

हिंद महासागर में चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति को भारत अपनी ‘नेकलेस ऑफ डायमंड्स’ नीति से जवाब दे रहा है। इस रणनीति के तहत सेशेल्स एक अहम केंद्र बन चुका है, जो भारत को समुद्री गतिविधियों पर निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा में मदद करता है। चीन की रणनीति में ग्वादर, हंबनटोटा और मोंगला जैसे बंदरगाह शामिल हैं, जबकि भारत अपने साझेदार देशों के जरिए संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। सेशेल्स का भौगोलिक स्थान इसे हिंद महासागर में बेहद रणनीतिक बनाता है। यह 115 द्वीपों का देश है, जो पूर्वी अफ्रीका, पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक के प्रमुख समुद्री मार्गों के बीच स्थित है। यहां से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा निर्भर करता है।

भारत और सेशेल्स के बीच असम्प्शन द्वीप पर सैन्य ढांचा विकसित करने की योजना भी है, जो हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से पर निगरानी में मदद करेगा। यह चीन के जिबूती नौसैनिक अड्डे के मुकाबले भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करता है। यहां एयरफील्ड और बंदरगाह जैसी सुविधाएं भविष्य में निगरानी अभियानों को और सक्षम बनाएंगी। भारत ने सेशेल्स में तटीय निगरानी रडार सिस्टम भी स्थापित किए हैं, जिनसे समुद्री गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। यह डेटा भारतीय इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (IFC-IOR) तक पहुंचता है, जहां पूरे क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा का विश्लेषण किया जाता है। इसके साथ मॉरीशस और मेडागास्कर जैसे देशों के सहयोग से एक मजबूत निगरानी नेटवर्क तैयार किया गया है।

भारत की ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region) नीति के तहत सेशेल्स को लगातार सहायता दी जा रही है। इसमें गश्ती नौकाएं, विमान, एम्बुलेंस और प्रशिक्षण सहायता शामिल है। दोनों देशों की नौसेनाएं नियमित संयुक्त अभ्यास भी करती हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे में सेशेल्स को तेज गश्ती जहाज ‘लेस्पवार’, पेट्रोल बोट और अन्य उपकरण भी सौंपे। उन्होंने कहा कि भारत एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में हमेशा सेशेल्स के साथ खड़ा रहेगा।

यह यात्रा भारत की समुद्री कूटनीति को नई दिशा देती है और हिंद महासागर में शक्ति संतुलन बनाए रखने की रणनीति को मजबूत करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा, व्यापार और ब्लू इकोनॉमी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

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