
x
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई है। अमेरिकी सैन्य कमांडर एडमिरल सैमुअल पापरो ने अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल विनीत मैक्कार्टी से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच जारी रक्षा सहयोग पर चर्चा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत यानी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को आगे बढ़ाना था। भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर इस मुलाकात की जानकारी दी।अमेरिकी दूतावास के अनुसार, एडमिरल पापरो ने जापान की यात्रा पर रवाना होने से पहले वाइस एडमिरल विनीत मैक्कार्टी से मुलाकात की। दोनों वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी में हुई प्रगति और भविष्य में सहयोग जारी रखने से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई। अमेरिकी पक्ष ने इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे रक्षा संबंधों का हिस्सा बताया।
अमेरिकी दूतावास ने साझा की मुलाकात की जानकारी
भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने सोमवार को X पर पोस्ट करते हुए भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी की प्रगति का उल्लेख किया। दूतावास ने बताया कि एडमिरल पापरो ने जापान जाते समय अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल विनीत मैक्कार्टी से मुलाकात की।अमेरिकी दूतावास ने अपने संदेश में कहा, "अमेरिका-भारत की अहम रक्षा साझेदारी लगातार आगे बढ़ रही है। जापान जाते समय एडमिरल पापरो ने वाइस एडमिरल विनीत मैक्कार्टी से मुलाकात की और हमारी रक्षा सेनाओं के बीच लगातार सहयोग पर चर्चा की।"दूतावास ने आगे कहा कि दोनों देशों की साझेदारी गहरी हो रही है और वे सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।इस बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका भारत के साथ रक्षा संबंधों को अपनी क्षेत्रीय रणनीतिक साझेदारी के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देख रहा है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर
एडमिरल पापरो और वाइस एडमिरल विनीत मैक्कार्टी के बीच हुई बातचीत का प्रमुख विषय इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाना रहा।हिंद-प्रशांत क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार, सामरिक गतिविधियों और वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत और अमेरिका दोनों इस क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं।दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी में सैन्य सहयोग, सुरक्षा संबंधी संवाद और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।अमेरिकी दूतावास ने भी अपने बयान में सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया है।
अंडमान और निकोबार कमांड की महत्वपूर्ण भूमिका
भारत की अंडमान और निकोबार कमांड देश की सामरिक सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भारतीय सशस्त्र बलों की एकीकृत त्रि-सेवा कमांड है, जिसमें थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच समन्वय स्थापित किया जाता है।अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच समुद्री संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र के आसपास अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से जुड़े प्रमुख मार्ग स्थित हैं।ऐसे में अंडमान और निकोबार कमांड के वरिष्ठ अधिकारी के साथ अमेरिकी सैन्य कमांडर की मुलाकात दोनों देशों के बीच रक्षा संवाद की निरंतरता को दर्शाती है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस बैठक के दौरान किसी नए सैन्य समझौते या संयुक्त अभियान की घोषणा का उल्लेख नहीं किया गया है।
पिछले सप्ताह नई दिल्ली पहुंचे थे एडमिरल पापरो
एडमिरल सैमुअल पापरो पिछले सप्ताह भारत की आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे थे। उनकी यात्रा का उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मजबूत करना और रणनीतिक सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा करना था।भारत प्रवास के दौरान उन्होंने देश के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बातचीत की। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान करने पर जोर दिया गया।एडमिरल पापरो की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच नियमित सैन्य संपर्क और उच्चस्तरीय रक्षा संवाद की प्रक्रिया का हिस्सा रही।उनकी यात्रा के दौरान हुई बैठकों में सुरक्षा संबंधी सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता सामने आई।
वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ हुई बातचीत
भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान एडमिरल पापरो ने वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों से मुलाकात कर रणनीतिक सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच संवाद को मजबूत करना और रक्षा संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करना था।इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग में उच्चस्तरीय सैन्य संवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।ऐसी बैठकों के माध्यम से दोनों देशों को सुरक्षा संबंधी प्राथमिकताओं और साझा हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है।
जापान यात्रा से पहले हुई महत्वपूर्ण मुलाकात
एडमिरल पापरो ने जापान रवाना होने से पहले वाइस एडमिरल विनीत मैक्कार्टी से मुलाकात की। अमेरिकी दूतावास ने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि यह बैठक उनकी जापान यात्रा के दौरान हुई।जापान भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार है। ऐसे में एडमिरल पापरो की क्षेत्रीय यात्राएं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य संवाद और रक्षा सहयोग की व्यापक प्रक्रिया से जुड़ी हैं।हालांकि, भारत में हुई इस मुलाकात और जापान यात्रा के बीच किसी विशेष संयुक्त कार्यक्रम या समझौते की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में लगातार बढ़ रहा सहयोग
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध पिछले वर्षों में व्यापक हुए हैं। दोनों देश सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी, सुरक्षा संवाद और रणनीतिक सहयोग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करते रहे हैं।द्विपक्षीय रक्षा संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े विषयों पर संवाद बनाए रखना है।अमेरिकी दूतावास के अनुसार, दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी लगातार आगे बढ़ रही है। एडमिरल पापरो और वाइस एडमिरल विनीत मैक्कार्टी की मुलाकात इसी सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और कदम है।
सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए मिलकर काम करने पर सहमति
अमेरिकी दूतावास ने अपने बयान में भारत और अमेरिका की रक्षा साझेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया।दोनों वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मुलाकात में जारी रक्षा सहयोग को लेकर बातचीत हुई। इससे दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय सैन्य संपर्क और रणनीतिक संवाद की निरंतरता सामने आई है।फिलहाल इस बैठक में किसी नए समझौते की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, अमेरिकी दूतावास ने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी में हो रही प्रगति को सकारात्मक बताया है।एडमिरल पापरो की भारत यात्रा और अंडमान-निकोबार कमांड के प्रमुख से मुलाकात ने एक बार फिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के महत्व को रेखांकित किया है।
Next Story





