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बर्नहैम के PM बनने से मजबूत होंगे भारत-ब्रिटेन रिश्ते: बिलिमोरिया

Saba Naaz
19 July 2026 9:52 PM IST
बर्नहैम के PM बनने से मजबूत होंगे भारत-ब्रिटेन रिश्ते: बिलिमोरिया
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लंदन। ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच रिश्तों को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि एंडी बर्नहैम के ब्रिटिश प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी आगे भी जारी रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीटा) के लागू होने के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार, निवेश, निर्यात और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिल सकती है।

56 वर्षीय एंडी बर्नहैम को शुक्रवार को निर्विरोध ब्रिटेन की लेबर पार्टी का नेता चुना गया। इसके बाद सोमवार को डाउनिंग स्ट्रीट में औपचारिक सत्ता हस्तांतरण के बाद वह प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। बर्नहैम ने अपने नेतृत्व में ब्रिटेन के कामकाज के तरीके में बदलाव और घरेलू नीतियों में सुधार का वादा किया है। हालांकि, विदेश नीति के मोर्चे पर भारत के साथ ब्रिटेन के संबंधों में निरंतरता बनाए रखने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और ब्रिटेन के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा, शिक्षा, तकनीक और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। ऐसे में नए प्रधानमंत्री के सामने भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

मैनचेस्टर में भारत की महावाणिज्य दूत विशाखा यादववंशी ने कहा कि एंडी बर्नहैम ने पिछले एक साल के दौरान भारत और उत्तर इंग्लैंड के संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि बर्नहैम का भारत के प्रति सकारात्मक रुख रहा है और उनके प्रयासों से दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिला है।

लेबर फ्रेंड्स ऑफ इंडिया नेटवर्क के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने भी बर्नहैम के नेतृत्व को भारत के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में स्थानीय स्तर पर सत्ता के विकेंद्रीकरण को लेकर बर्नहैम का नजरिया भारत की संघीय व्यवस्था से मेल खाता है। इससे दोनों देशों के बीच प्रशासनिक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।

कोबरा बीयर के संस्थापक और इंडिया ऑल पार्टी पार्लियामेंटरी ग्रुप के सह-अध्यक्ष लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने भी भरोसा जताया है कि एंडी बर्नहैम भारत को प्राथमिकता देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिली है और अब उम्मीद है कि नया नेतृत्व देश में स्थिरता लेकर आएगा।

बिलिमोरिया के अनुसार, भारत और ब्रिटेन के रिश्ते केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के बीच संबंध भी बेहद मजबूत हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बर्नहैम के नेतृत्व में भारत-ब्रिटेन साझेदारी को और विस्तार मिलेगा।

हाउस ऑफ लार्ड्स के नए ब्रिटिश भारतीय लेबर सदस्य और तकनीकी उद्यमी उदय नागराजू ने कहा कि अब दोनों देशों के बीच हुए व्यापार समझौते को वास्तविक अवसरों में बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में निवेश, निर्यात, रोजगार, अनुसंधान साझेदारी और छोटे कारोबारों के लिए नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर दोनों देशों की कंपनियों में भी उत्साह देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन से भारतीय कंपनियों को ब्रिटिश बाजार में विस्तार का मौका मिलेगा, जबकि ब्रिटेन की कंपनियों के लिए भारत में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।

इसके अलावा शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ने की संभावना है। दोनों देश पहले से ही कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर साथ काम कर रहे हैं और नए नेतृत्व के तहत इन क्षेत्रों में और प्रगति की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, एंडी बर्नहैम के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत-ब्रिटेन संबंधों में निरंतरता और मजबूती की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक बदलाव के बावजूद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी मजबूत बनी रहेगी और आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर सामने आएंगे।

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