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पाकिस्तान-चीन J-35 डील पर संकट, स्टील्थ फाइटर सौंपने से पीछे हटा ड्रैगन

Saba Naaz
19 July 2026 8:52 PM IST
पाकिस्तान-चीन J-35 डील पर संकट, स्टील्थ फाइटर सौंपने से पीछे हटा ड्रैगन
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बीजिंग। चीन और पाकिस्तान के बीच J-35 स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है, लेकिन अब इस संभावित मेगा डील पर सवाल खड़े हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और रणनीतिक विश्लेषणों के मुताबिक, चीन फिलहाल पाकिस्तान को अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के J-35 लड़ाकू विमान देने के पक्ष में नहीं दिख रहा है। हालांकि, चीन या पाकिस्तान की ओर से इस सौदे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों की पत्रिका द डिप्लोमैट में प्रकाशित एक विश्लेषण में बीजिंग के स्वतंत्र थिंक टैंक के सहायक शोधकर्ता यांग शियाओतोंग ने इस डील की संभावनाओं पर चर्चा की है। उनके अनुसार, चीन जल्द ही पाकिस्तान को J-35 विमान सौंपे, इसकी संभावना काफी कम है। इसके पीछे कई रणनीतिक, तकनीकी और भू-राजनीतिक कारण बताए गए हैं।

विश्लेषण के मुताबिक, सबसे बड़ा कारण दक्षिण एशिया में सैन्य संतुलन को लेकर चीन की चिंता है। वर्तमान समय में भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों के पास फ्रंटलाइन सेवा में पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर विमान नहीं हैं। अगर पाकिस्तान को बड़ी संख्या में J-35 विमान मिल जाते हैं तो क्षेत्र में हवाई शक्ति का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान को करीब 40 J-35 विमान मिलने की स्थिति में दक्षिण एशिया में सैन्य समीकरण बदल सकते हैं। भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं, ऐसे में किसी भी संभावित तनाव के दौरान अत्याधुनिक हथियारों की मौजूदगी स्थिति को और गंभीर बना सकती है। चीन नहीं चाहेगा कि किसी संकट की स्थिति में उसका दिया हुआ हथियार क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने का कारण बने।

चीन की अपनी रणनीतिक प्राथमिकताएं भी इस डील में बड़ी बाधा मानी जा रही हैं। वर्तमान में बीजिंग का मुख्य ध्यान पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित है, जहां वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में चीन दक्षिण एशिया में किसी बड़े सैन्य बदलाव को लेकर सतर्क रहना चाहता है।

इसके अलावा चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की अपनी जरूरतें भी J-35 निर्यात में बाधा बन सकती हैं। चीन ने हाल के वर्षों में अपने वायुसेना और नौसेना बेड़े में पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को शामिल करना शुरू किया है। ऐसे समय में बड़ी संख्या में J-35 विमानों को दूसरे देश को देना चीन के अपने सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम को प्रभावित कर सकता है।

तकनीकी सुरक्षा भी चीन के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। चीन पहले पाकिस्तान को J-10CE जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान दे चुका है, लेकिन J-35 उससे कहीं ज्यादा उन्नत तकनीक वाला विमान है। इसमें स्टील्थ डिजाइन, आधुनिक सेंसर सिस्टम और अत्याधुनिक एवियोनिक्स तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

चीन को आशंका है कि इतनी संवेदनशील तकनीक किसी भी तरह दूसरे देशों की खुफिया एजेंसियों के हाथ लग सकती है। स्टील्थ क्षमता और सेंसर सिस्टम जैसी तकनीक किसी भी देश की सैन्य बढ़त के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए बीजिंग अपने सबसे आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्यात को लेकर बेहद सावधानी बरत रहा है।

हालांकि, पाकिस्तान लंबे समय से अपनी वायुसेना को मजबूत करने के लिए चीन से अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हासिल करने की कोशिश कर रहा है। J-35 को लेकर पाकिस्तान की दिलचस्पी का मुख्य कारण क्षेत्रीय हवाई शक्ति में बढ़त हासिल करना माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा संबंध मजबूत हैं, लेकिन हर अत्याधुनिक हथियार का निर्यात केवल राजनीतिक दोस्ती के आधार पर नहीं होता। इसमें रणनीतिक हित, तकनीकी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।

फिलहाल J-35 सौदे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। चीन की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग इस फैसले को जल्दबाजी में नहीं लेना चाहेगा। आने वाले समय में ही साफ होगा कि पाकिस्तान को चीन का यह अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट मिलता है या यह डील सिर्फ चर्चा तक सीमित रह जाती है।

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