विश्व
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने उठाया स्वास्थ्य के अधिकार का मुद्दा
Ratna Netam
23 Oct 2026 5:46 PM IST

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न्यूयॉर्क : 23 अक्टूबर 2026। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में स्वास्थ्य के अधिकार को मजबूत बनाने और नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। संयुक्त राष्ट्र में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के सर्वोच्च संभव मानक का आनंद लेने के अधिकार से संबंधित विशेष प्रतिवेदक के साथ आयोजित संवाद में भारत ने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख किया। इस दौरान भाजपा सांसद अरुण गोविल ने स्वास्थ्य के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण व्याख्याओं और ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया।न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बातचीत की जानकारी साझा की। संवाद का मुख्य विषय स्वास्थ्य के अधिकार को न्यायालय में लागू कराने की व्यवस्था के जरिए न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य केवल चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच का विषय नहीं, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों से भी जुड़ा है।
स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में आने वाली बाधाओं का जिक्र
संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान अरुण गोविल ने स्वीकार किया कि स्वास्थ्य संबंधी अधिकारों का लाभ उठाने में नागरिकों को कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।उन्होंने कहा कि इलाज का खर्च, भाषा संबंधी समस्याएं, स्वास्थ्य सेवाओं की दूरी और कानूनी अधिकारों के बारे में सीमित जानकारी जैसी बाधाएं नागरिकों के स्वास्थ्य के अधिकार को प्रभावित करती हैं।गोविल ने कहा कि विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट में इन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में कॉर्पोरेट संस्थाओं की शक्ति और जवाबदेही के मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने कहा कि कुछ परिस्थितियों में बड़ी व्यावसायिक संस्थाएं जवाबदेही से बच निकलती हैं, जिससे नागरिकों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य को जीवन के अधिकार से जोड़ा
अरुण गोविल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर इसकी व्यापक व्याख्या की है।अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा प्रदान करता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने विभिन्न फैसलों में स्वास्थ्य और चिकित्सा देखभाल को गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जोड़ा है।गोविल ने वर्ष 1995 के एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत ने कर्मचारियों के स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं को मौलिक अधिकारों से जुड़ा माना था।उन्होंने बताया कि औद्योगिक विकास के दौरान कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जा सकती। सुरक्षित कार्यस्थल और चिकित्सा सुरक्षा उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर भी चर्चा
भारत की ओर से स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारणों का भी उल्लेख किया गया।गोविल ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मिलने वाले अधिकारों से जोड़ा है।उन्होंने वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से सुरक्षा के अधिकार को संवैधानिक मान्यता दिए जाने का भी जिक्र किया।इसके अलावा पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी संबंधी लेबल और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से जुड़े न्यायिक हस्तक्षेपों का उल्लेख किया गया।
दुनिया के देशों को एक-दूसरे से सीखने की जरूरत
अरुण गोविल ने विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि इसमें दुनिया के विभिन्न देशों की अच्छी व्यवस्थाओं और सफल प्रयासों का उल्लेख किया गया हैउन्होंने कहा कि ऐसी रिपोर्टों से संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और अपनी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार करने का अवसर मिलता है।संयुक्त राष्ट्र की संबंधित रिपोर्ट में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि कानूनी सहायता की कमी, महंगी न्यायिक प्रक्रिया और भौगोलिक दूरी स्वास्थ्य संबंधी अधिकारों के संरक्षण में बड़ी बाधाएं बन सकती हैं।
सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं पर भारत का जोर
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और समान बनाने के प्रयास जारी हैं।गोविल ने कहा कि भारत अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी अधिकारों को व्यवहार में लागू करने के लिए न्यायिक संरक्षण, जवाबदेही और प्रभावी व्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण बताया।संयुक्त राष्ट्र में हुई इस चर्चा ने स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के साथ नागरिकों के कानूनी अधिकारों और न्याय तक पहुंच के महत्व को भी रेखांकित किया।
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