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UN में भारत ने उठाई विकास के अधिकार की आवाज

Ratna Netam
24 Sept 2026 3:55 PM IST
UN में भारत ने उठाई विकास के अधिकार की आवाज
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न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से समावेशी विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य पेश करते हुए ‘विकास के अधिकार पर समझौते’ को जल्द अपनाने का समर्थन किया। यह उच्च स्तरीय सत्र ‘विकास के अधिकार पर घोषणा’ की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया था।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया और समावेशी विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा बहुपक्षीय सुधार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही भारत ने ‘Covenant on the Right to Development’ को जल्द अपनाने का समर्थन किया।संयुक्त राष्ट्र की ‘विकास के अधिकार पर घोषणा’ के अनुसार विकास का अधिकार एक अविच्छेद्य मानव अधिकार है। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति और सभी लोगों को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास में भाग लेने, उसमें योगदान देने और उसके लाभ प्राप्त करने का अधिकार है। इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा देना है जिसमें मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं को पूरी तरह साकार किया जा सके।
40 साल पहले अपनाई गई थी घोषणा
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1986 में ‘Declaration on the Right to Development’ को अपनाया था। वर्ष 2026 में इसके 40 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उच्च स्तरीय सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान सदस्य देशों को पिछले चार दशकों की उपलब्धियों के साथ विकास के क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों पर विचार करने का अवसर मिला।संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, घोषणा को अपनाए जाने के बाद इसने सतत विकास, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक समावेशन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को दिशा दी है। पिछले चार दशकों में जीवन स्तर में सुधार, अत्यधिक गरीबी से बड़ी आबादी को बाहर निकालने और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में प्रगति हुई है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने यह भी माना है कि यह प्रगति सभी देशों और समुदायों में समान नहीं रही है।
भारत ने बहुपक्षीय सुधार पर दिया जोर
भारत की ओर से सिबी जॉर्ज ने बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। भारत लंबे समय से वैश्विक संस्थाओं को वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की बात करता रहा है। इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत ने विकास के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय सुधार से जोड़ते हुए अपना पक्ष रखा।भारत का कहना है कि समावेशी विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग महत्वपूर्ण है। विकासशील देशों के सामने वित्तीय संसाधनों, तकनीक, क्षमता निर्माण और अन्य संरचनात्मक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
विकास के अधिकार पर समझौते का समर्थन
भारत ने इस मौके पर ‘विकास के अधिकार पर समझौते’ को जल्द अपनाए जाने का समर्थन किया। इसका उद्देश्य विकास के अधिकार से जुड़े सिद्धांतों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाना है।भारत की ओर से इस समझौते को जल्द अपनाने की वकालत ऐसे समय की गई है जब दुनिया के कई विकासशील देश आर्थिक असमानता, गरीबी, वित्तीय संसाधनों की कमी और विकास संबंधी अन्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।संयुक्त राष्ट्र ने भी कहा है कि कई देशों को ऐसी संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ता है जो उनकी विकास संभावनाओं को सीमित करती हैं। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर विकास के लिए वित्तपोषण की कमी भी बनी हुई है। ऐसे में घोषणा की 40वीं वर्षगांठ को विकास के अधिकार को फिर से वैश्विक एजेंडे के केंद्र में लाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
गरीबी उन्मूलन और सामाजिक समावेशन पर फोकस
विकास के अधिकार की अवधारणा केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, समान अवसर और राजनीतिक भागीदारी जैसे पहलू भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, व्यक्ति को विकास की प्रक्रिया में भाग लेने के साथ उसके लाभ प्राप्त करने का भी अधिकार होना चाहिए।पिछले चार दशकों में वैश्विक स्तर पर कई क्षेत्रों में सुधार हुआ है, लेकिन अलग-अलग देशों और समाजों के बीच विकास की खाई अभी भी मौजूद है। जलवायु परिवर्तन, संघर्ष, आर्थिक असमानता और वित्तीय संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियां कई देशों की विकास यात्रा को प्रभावित कर रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बताया महत्वपूर्ण
भारत की ओर से पेश किए गए वक्तव्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को विशेष महत्व दिया गया। विकासशील देशों के लिए वित्त, तकनीक और क्षमता निर्माण तक बेहतर पहुंच वैश्विक विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।भारत ने अपने राष्ट्रीय वक्तव्य के जरिए यह संदेश दिया कि विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें समाज के सभी वर्गों की भागीदारी हो और विकास का लाभ व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचे। इसके साथ ही वैश्विक संस्थाओं की कार्यप्रणाली में सुधार और विकासशील देशों की चिंताओं को पर्याप्त स्थान देने पर भी जोर दिया गया।
40वीं वर्षगांठ पर भविष्य की चुनौतियों पर मंथन
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, घोषणा की 40वीं वर्षगांठ मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने और अधिक समावेशी, टिकाऊ तथा समान भविष्य की दिशा में विकास के अधिकार को महत्वपूर्ण ढांचे के रूप में फिर से स्थापित करने का अवसर है।उच्च स्तरीय सत्र में भारत की भागीदारी के दौरान सिबी जॉर्ज ने इसी दिशा में समावेशी विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय सुधार के प्रति देश का संकल्प दोहराया। भारत ने साथ ही ‘विकास के अधिकार पर समझौते’ को जल्द अपनाने का समर्थन करते हुए विकास को वैश्विक सहयोग और समान अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया।
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