विश्व

UN में भारत ने उठाया वित्तीय समानता का मुद्दा

Ratna Netam
6 Oct 2026 8:11 PM IST
UN में भारत ने उठाया वित्तीय समानता का मुद्दा
x
न्यूयॉर्क। भारतीय सांसदों के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अपने आधिकारिक कार्यक्रम की शुरुआत कर दी है। प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न समितियों में होने वाली बैठकों से पहले न्यूयॉर्क स्थित UN मुख्यालय परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद भारतीय सांसदों ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था, विकासशील देशों के लिए संसाधनों की उपलब्धता और संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा।संयुक्त राष्ट्र महासभा की दूसरी समिति की सामान्य बहस में भारत की ओर से सांसद सीपी जोशी ने बयान दिया। दूसरी समिति आर्थिक और वित्तीय मामलों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करती है। जोशी ने अपने संबोधन में आर्थिक समावेशन, वैश्विक वित्तीय समानता और विकासशील देशों की जरूरतों को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को विकास की खाई कम करने के लिए सस्ती और पूर्वानुमानित वित्तीय सहायता के साथ वैश्विक वित्तीय संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की मौजूदा संरचना में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। भारतीय पक्ष का कहना है कि विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं की संरचना ऐतिहासिक परिस्थितियों में तैयार हुई थी, जबकि आज वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास संबंधी जरूरतें काफी बदल चुकी हैं। इसी कारण विकासशील और ग्लोबल साउथ देशों को निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भागीदारी मिलनी चाहिए।सीपी जोशी ने कहा कि विकासशील देशों के सामने केवल संसाधनों की कमी की समस्या नहीं है, बल्कि उपलब्ध वित्त तक पहुंच भी एक बड़ी चुनौती है। कई देशों को ऊंची उधारी लागत, ऋण बोझ और अनिश्चित वित्तीय प्रवाह का सामना करना पड़ता है। ऐसे में विकास परियोजनाओं, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए सस्ती तथा भरोसेमंद वित्तीय व्यवस्था जरूरी है।
भारतीय सांसद ने भारत की घरेलू उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने वित्तीय समावेशन, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और सीधे लाभ हस्तांतरण जैसी व्यवस्थाओं के जरिए बड़ी आबादी को औपचारिक आर्थिक व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया है। भारत इन अनुभवों को अन्य विकासशील देशों के साथ साझा करने का भी समर्थन करता है।भारत ने इस मंच पर विकास वित्त के लिए अपने योगदान का उल्लेख करते हुए India-UN Development Partnership Fund की भी चर्चा की। भारत इस कोष के लिए 150 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता कर चुका है। इस व्यवस्था की खासियत यह है कि सहयोग प्राप्त करने वाले देश अपनी विकास प्राथमिकताएं खुद तय करते हैं और सहायता ऋण के बजाय अनुदान आधारित मॉडल पर दी जाती है।
इसके अलावा भारत ने आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए Coalition for Disaster Resilient Infrastructure यानी CDRI में भी करीब 70 मिलियन डॉलर के योगदान का उल्लेख किया। भारत में इसका सचिवालय स्थित है और इसका उद्देश्य देशों को जलवायु तथा प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक मजबूत बुनियादी ढांचा विकसित करने में सहायता देना है।भारतीय प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पांचवीं समिति से जुड़े वित्तीय मुद्दे भी प्रमुख रहे। भारत ने सदस्य देशों से संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित योगदान को पूरा और समय पर जमा करने की अपील की है। भारत ने अपने रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि वह नियमित बजट के लिए अपने योगदान का समय पर भुगतान करता रहा है और UN की ऑनर लिस्ट में शामिल रहा है।
पांचवीं समिति में भारत की ओर से सांसद बंशीलाल गुर्जर ने सदस्य देशों से अपनी निर्धारित वित्तीय जिम्मेदारियां समय पर, पूरी और बिना शर्त पूरी करने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र हाल के वर्षों में नकदी संकट का सामना करता रहा है और देरी से भुगतान होने के कारण कई कार्यक्रमों और गतिविधियों पर दबाव पड़ा है।भारत का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिरता केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर विकास, मानवीय सहायता और वैश्विक सहयोग की क्षमता पर पड़ता है। समय पर योगदान नहीं मिलने से संगठन की स्वीकृत योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में बाधा आ सकती है।15 सदस्यीय भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचा है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सांसद शामिल हैं। पहले समूह में 10 लोकसभा और पांच राज्यसभा सदस्य शामिल किए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल में सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ विपक्षी दलों के सांसद भी शामिल हैं।
भारतीय सांसद संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न समितियों में भारत का दृष्टिकोण पेश करेंगे। आर्थिक और वित्तीय मुद्दों के अलावा विकास, बजट, सामाजिक विषयों और बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी सांसद बैठकों में भाग लेंगे।भारत ने सतत विकास लक्ष्यों यानी SDGs को लेकर भी यह रुख दोहराया है कि 2030 तक अधूरे रह जाने वाले विकास लक्ष्यों को आगे भी जारी रखा जाना चाहिए। भारत का कहना है कि वैश्विक विकास ढांचे में देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और स्थानीय परिस्थितियों का सम्मान होना चाहिए।संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का संदेश मुख्य रूप से वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को अधिक समावेशी और न्यायसंगत बनाने पर केंद्रित है। भारत ने विकासशील देशों के लिए आसान वित्तीय पहुंच, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व और संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय जिम्मेदारियों को समय पर पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया है।आने वाले दिनों में भारतीय सांसद विभिन्न UN समितियों में अपनी भागीदारी जारी रखेंगे। इन बैठकों में भारत वैश्विक दक्षिण की विकास संबंधी चुनौतियों, वित्तीय समानता और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।
Next Story