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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में बिजली संकट एक बार फिर गंभीर होता दिखाई दे रहा है। कई बिजली उत्पादन इकाइयों के बंद होने और पनबिजली उत्पादन में कमी के कारण देश में बिजली की कुल कमी 4,000 मेगावाट से अधिक हो गई है। इसके चलते शहरी और ग्रामीण इलाकों में लोड-शेडिंग का समय बढ़ा दिया गया है और उपभोक्ताओं को प्रतिदिन तीन से चार घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।ARY News ने नेशनल ट्रांसमिशन एंड डिस्पैच कंपनी यानी NTDC से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि कई पावर प्लांट सिस्टम से बाहर हो गए हैं। साथ ही हाइड्रोपावर उत्पादन में भी गिरावट आई है। उत्पादन में कमी का सीधा असर बिजली की उपलब्धता पर पड़ा है और देशभर में मांग तथा आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ गया है।
स्थिति बिगड़ने के बाद बिजली वितरण कंपनियों यानी DISCOs को लोड-शेडिंग की अवधि बढ़ानी पड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से चार घंटे तक बिजली बंद की जा रही है। कुछ इलाकों में बिजली कटौती का समय अचानक बढ़ने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।लाहौर और उसके आसपास का क्षेत्र बिजली संकट से ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, LESCO क्षेत्र में बिजली की मांग करीब 4,000 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि उपलब्ध आपूर्ति लगभग 3,000 मेगावाट रही। इससे करीब 1,000 मेगावाट का अंतर पैदा हुआ। 6 अक्टूबर की बाद की रिपोर्टों में LESCO क्षेत्र का शॉर्टफॉल 1,500 मेगावाट तक पहुंचने की भी बात कही गई है।
LESCO क्षेत्र के कुछ हिस्सों में स्थिति इतनी गंभीर बताई जा रही है कि एक घंटे बिजली मिलने के बाद करीब एक घंटे की जबरन लोड-शेडिंग की जा रही है। सूत्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उत्पादन और ईंधन आपूर्ति की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में बिजली कटौती की अवधि और बढ़ सकती है।बिजली उत्पादन में गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। पनबिजली उत्पादन कम होने के अलावा गैस और डीजल की उपलब्धता में कमी ने भी कुछ पावर प्लांट्स के उत्पादन को प्रभावित किया है। इससे पहले अगस्त के अंत में भी गैस और तेल की कमी के कारण पंजाब समेत कई क्षेत्रों में बिजली उत्पादन कम होने और लोड-शेडिंग बढ़ने की खबरें सामने आई थीं।
मौजूदा संकट ने पाकिस्तान सरकार के उन दावों पर भी बहस तेज कर दी है, जिनमें बिजली की कमी को नियंत्रण में लाने की बात कही जाती रही है। ARY News की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि बिजली की कमी पूरी नहीं हो सकी और उत्पादन घटने से शॉर्टफॉल दोबारा बढ़ गया है। हालांकि यह आकलन मीडिया रिपोर्ट और संबंधित सूत्रों पर आधारित है।बिजली कटौती का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक बिजली बंद रहने से दुकानों, छोटे कारोबार, औद्योगिक इकाइयों और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी परेशानी हो सकती है। खासतौर पर ऐसे उद्योग जो लगातार बिजली आपूर्ति पर निर्भर हैं, उन्हें वैकल्पिक बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।
लाहौर में बिजली संकट के साथ ईंधन की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई गई है। ARY News की रिपोर्ट में गैस के बाद डीजल की कमी का भी उल्लेख किया गया है। ईंधन आपूर्ति कमजोर रहने की स्थिति में थर्मल पावर उत्पादन पर और दबाव पड़ सकता है।इस बीच पाकिस्तान की बिजली नियामक संस्था NEPRA ने K-Electric को केवल एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल यानी ATC नुकसान के आधार पर पूरे फीडर पर लोड-शेडिंग करने से रोकने का निर्देश दिया है। नियामक का कहना है कि नियमित रूप से बिल भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को ऐसे क्षेत्रों में बिजली चोरी या अन्य उपभोक्ताओं की अनियमितताओं की सजा नहीं दी जानी चाहिए।
NEPRA ने K-Electric से बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ अलग से कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही व्यावसायिक और तकनीकी नुकसान कम करने के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। नियामक ने अनघोषित बिजली कटौती को लेकर भी सख्त रुख दिखाया है।पाकिस्तान में बिजली संकट कोई नई समस्या नहीं है। बिजली उत्पादन क्षमता, ईंधन आपूर्ति, हाइड्रोपावर पर निर्भरता, ट्रांसमिशन नुकसान और वितरण क्षेत्र की वित्तीय समस्याएं लंबे समय से ऊर्जा व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। जब बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है या उत्पादन इकाइयां बंद होती हैं, तो मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ने से लोड-शेडिंग का सहारा लेना पड़ता है।
हालिया स्थिति में हाइड्रोपावर उत्पादन में गिरावट और कई उत्पादन इकाइयों के बंद होने का असर एक साथ सामने आया है। इसके कारण देश का बिजली शॉर्टफॉल 4,000 मेगावाट के स्तर को पार कर गया। अधिकारियों और ऊर्जा कंपनियों के लिए अब प्राथमिक चुनौती बंद पड़ी उत्पादन क्षमता को बहाल करना और ईंधन आपूर्ति सामान्य करना है।यदि उत्पादन जल्दी नहीं बढ़ता है तो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बिजली कटौती का समय और लंबा हो सकता है। खास तौर पर लाहौर और LESCO के तहत आने वाले इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत कब मिलेगी, इसे लेकर स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। मौजूदा आंकड़े यही संकेत देते हैं कि पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बना हुआ है और मांग-आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए उत्पादन बढ़ाना जरूरी होगा।
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