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दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी, चाहे जान चली जाए: शेख हसीना के ऐलान से मचा सियासी बवाल

Gulabi Jagat
6 Aug 2026 6:31 AM IST
दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी, चाहे जान चली जाए: शेख हसीना के ऐलान से मचा सियासी बवाल
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Bangladesh: बांग्लादेश में छात्र आंदोलन (Gen-Z आंदोलन) के बाद शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के दो वर्ष पूरे होने के मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। नई दिल्ली स्थित द फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में आयोजित एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने घोषणा की कि वह इस वर्ष दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी, चाहे इसके लिए उन्हें अपनी जान ही क्यों न गंवानी पड़े।

करीब 25 मिनट तक चले अपने संबोधन में सुरक्षा कारणों के चलते शेख हसीना का कैमरा बंद रखा गया और केवल उनकी आवाज सुनाई दी। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में बांग्लादेश के लोगों ने अत्यधिक पीड़ा और भय का सामना किया है। उनके अनुसार देश में ऐसा माहौल बना दिया गया है, जहां आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह इस डर के माहौल को खत्म करने और लोकतंत्र की बहाली के लिए अपने देश लौटने का संकल्प ले चुकी हैं।

शेख हसीना ने मौजूदा बांग्लादेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें झूठे मुकदमों, फर्जी सुनवाई और मौत की सजा की धमकियों के जरिए डराने की कोशिश की जा रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इन दबावों से पीछे हटने वाली नहीं हैं और किसी भी परिस्थिति में अपने लोगों के बीच लौटेंगी।

पूर्व प्रधानमंत्री के इस संबोधन के तुरंत बाद बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। रिपोर्टों के अनुसार, उनके कार्यक्रम से जुड़े पूर्व क्रिकेटर और अवामी लीग के पूर्व सांसद शाकिब अल हसन के घर पर भी हमला किया गया। कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना के बयान का विरोध किया, जिससे तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

गौरतलब है कि अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद वह भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं। बीते दो वर्षों में उन्होंने कई बार अपने समर्थकों को संबोधित किया है और लोकतंत्र की बहाली की बात दोहराई है। हालांकि, दिसंबर में वापसी की उनकी यह घोषणा अब तक का सबसे स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि शेख हसीना वास्तव में दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का प्रयास करती हैं, तो इससे देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर, उनके बयान के बाद जिस तरह विरोध प्रदर्शन शुरू हुए हैं, उससे साफ है कि बांग्लादेश का राजनीतिक माहौल अभी भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

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