
वर्ल्ड | हंगरी ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) की सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जल्द ही हंगरी दौरे पर आने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस कदम का संबंध इजरायल के खिलाफ संभावित ICC जांच से हो सकता है।
हंगरी का फैसला क्यों अहम?
हंगरी ने ICC की सदस्यता छोड़ने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसे इजरायल को समर्थन देने की रणनीति मान रहे हैं।
ICC फिलहाल इजरायल के गाजा में किए गए हमलों की जांच कर रहा है।
अगर ICC नेतन्याहू के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है, तो हंगरी को उसमें शामिल नहीं होना पड़ेगा।
हंगरी पहले भी इजरायल समर्थक रुख अपनाता रहा है और नेतन्याहू सरकार के फैसलों का समर्थन करता रहा है।
इजरायल-हंगरी की नजदीकी
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन और नेतन्याहू के बीच घनिष्ठ संबंध हैं।
हंगरी यूरोपीय संघ (EU) में इजरायल के पक्ष में खुलकर बोलने वाले देशों में से एक है।
नेतन्याहू की यात्रा से पहले हंगरी का यह फैसला राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
ओर्बन सरकार को पश्चिमी देशों से आलोचना का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन वह पहले भी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के खिलाफ कड़े फैसले ले चुकी है।
ICC के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?
हंगरी के ICC से हटने से अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की वैश्विक स्वीकार्यता पर असर पड़ सकता है।
इससे अन्य देशों को भी ICC से हटने का प्रोत्साहन मिल सकता है।
इजरायल पर चल रही संभावित जांच कमजोर हो सकती है, क्योंकि एक सहयोगी देश कम हो जाएगा।
पश्चिमी देशों और यूरोपीय संघ के अन्य सदस्य हंगरी पर दबाव बना सकते हैं कि वह इस फैसले को वापस ले।
क्या होगा आगे?
हंगरी आधिकारिक रूप से ICC से हटने की प्रक्रिया जल्द शुरू करेगा।
नेतन्याहू की यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी।
यूरोपीय संघ हंगरी के इस कदम की समीक्षा कर सकता है।





