
वर्ल्ड | अमेरिका में भारतवंशी सांसदों ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ लगाने के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती कदम बताया है और कहा है कि इससे अमेरिका को ही भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। ट्रंप ने वादा किया है कि अगर वह 2024 का चुनाव जीतते हैं, तो विदेशी वस्तुओं पर 10% टैरिफ और चीन से आयात होने वाले उत्पादों पर 60% टैरिफ लगाएंगे।
भारतवंशी सांसदों की नाराजगी क्यों?
भारतवंशी सांसदों ने ट्रंप की नीति को संरक्षणवादी और आर्थिक रूप से खतरनाक करार दिया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी, नौकरियां प्रभावित होंगी, और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
कांग्रेस सांसद रोज खन्ना ने कहा, "इस तरह के टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को महंगे दामों पर सामान खरीदना पड़ेगा। यह नीति अर्थव्यवस्था को धीमा कर देगी।"
सांसद प्रमिला जयपाल ने भी ट्रंप के फैसले को अनुचित बताया और कहा, "अमेरिका को व्यापारिक संबंध सुधारने चाहिए, न कि टैरिफ लगाकर वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा खत्म करनी चाहिए।"
टैरिफ से अमेरिका को कैसे नुकसान होगा?
उपभोक्ताओं पर असर: जब विदेशों से आने वाले उत्पादों पर अधिक शुल्क लगेगा, तो अमेरिका में उन उत्पादों की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी।
व्यापार संबंधों पर असर: ट्रंप की टैरिफ नीति से भारत, चीन और यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में तनाव आ सकता है।
नौकरियों पर खतरा: कई अमेरिकी कंपनियां उच्च टैरिफ के कारण लागत बढ़ने से नुकसान में आ सकती हैं, जिससे नौकरियों पर असर पड़ेगा।
महंगाई बढ़ेगी: जब विदेशी उत्पाद महंगे होंगे, तो अमेरिकी बाजार में महंगाई बढ़ सकती है, जिससे आम नागरिकों पर बोझ बढ़ेगा।
ट्रंप की दलील और आलोचना
ट्रंप का कहना है कि टैरिफ लगाने से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इससे महंगाई और बेरोजगारी बढ़ सकती है, और अमेरिका की वैश्विक स्थिति कमजोर हो सकती है।
भारतवंशी सांसदों का कहना है कि यह नीति न सिर्फ अमेरिका के लिए नुकसानदायक है, बल्कि इससे भारत और अन्य व्यापारिक साझेदार देशों को भी झटका लगेगा।
अब यह देखना होगा कि अगर ट्रंप राष्ट्रपति बनते हैं तो क्या वह अपने टैरिफ फैसले को लागू करेंगे, या कांग्रेस और व्यापारिक संगठनों के दबाव में इसे वापस लेंगे।





